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बड़ी परियोजना घोषित होते ही जमीन की खरीद–फरोख्त पर ब्रेक, 5 डिसमिल से कम रकबे की बिक्री पूरी तरह बंद

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छत्तीसगढ़ में लागू होगा ‘भू-आधार कार्ड’, हर जमीन को मिलेगी यूनिक डिजिटल पहचान
छत्तीसगढ़ में जमीन की खरीद–बिक्री और बंदोबस्ती को लेकर सरकार ने बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। राज्य के किसी भी क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग, औद्योगिक कॉरिडोर या अन्य बड़ी परियोजना की घोषणा होते ही वहां की जमीन की खरीद–फरोख्त पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी जाएगी। इसके साथ ही 5 डिसमिल से कम रकबे की जमीन की खरीद–बिक्री पर पूर्ण रोक लगा दी गई है।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन तथा उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने छत्तीसगढ़ शासन के दो वर्ष पूरे होने पर मीडिया से बातचीत में इस निर्णय की जानकारी दी।
परियोजना क्षेत्र में जमीन की सौदेबाजी पर रोक
मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि बड़ी परियोजनाओं के ऐलान के बाद अक्सर जमीनों की कटिंग, बंदोबस्ती में बदलाव और बिचौलियों की सक्रियता बढ़ जाती है, जिससे किसान, सरकार और स्वयं परियोजना—तीनों को नुकसान होता है।
“योजना घोषित होते ही संबंधित क्षेत्र में जमीन की खरीद–बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। इससे दलालों पर लगाम लगेगी और किसानों के हित सुरक्षित रहेंगे,” — टंकराम वर्मा, मंत्री
5 डिसमिल से कम जमीन की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध
सरकार ने शहरी और अर्धशहरी क्षेत्रों में बढ़ते भूमि विवादों को देखते हुए 5 डिसमिल से कम रकबे की जमीन की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी है।
हालांकि, TNC नियमों के तहत 2 से 5 एकड़ भूमि की वैध प्लाटिंग अनुमोदन के बाद की जा सकेगी, लेकिन छोटे-छोटे भूखंडों की खरीद–फरोख्त नहीं होगी। सरकार का मानना है कि छोटे प्लॉट्स ही अधिकतर विवादों और राजस्व हानि का कारण बनते हैं।
अब जमीन का भी बनेगा आधार – ‘भू-आधार कार्ड’
छत्तीसगढ़ सरकार सभी जमीनों को डिजिटल पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। हर भूखंड को यूनिक आइडेंटिटी पिन के साथ ‘भू-आधार कार्ड’ जारी किया जाएगा।
डीजीपीएस सिस्टम से जमीन का सर्वे
सभी भू-नक्शों की जियो-रेफरेंसिंग
शहरी क्षेत्रों की छोटी से छोटी जमीन का बनेगा डिजिटल रिकॉर्ड
25 करोड़ रुपये का प्रावधान
हाउसिंग बोर्ड के नाम होगी जमीन
अब हाउसिंग बोर्ड की कॉलोनियों में मकान के साथ जमीन भी हाउसिंग बोर्ड के नाम दर्ज होगी। इससे खरीदारों को स्पष्ट मालिकाना हक मिलेगा और भविष्य में जमीन ट्रांसफर से जुड़ी समस्याएं खत्म होंगी।
भूमि विवाद निपटारे में तेजी
सभी जमीन संबंधी दस्तावेज सिविल न्यायालय से डिजिटल रूप से जोड़े गए
राजस्व अभिलेख सुधार का अधिकार अब तहसीलदारों को
किसान पुस्तिका प्रणाली होगी समाप्त, पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि पूर्ववर्ती सरकार के दौरान हुए सरकारी भूमि आवंटन और रजिस्ट्रेशन की जांच की जा रही है और नियमों के तहत कार्रवाई होगी।

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