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मौत का गड्ढा बना खनन का छोड़ा हुआ जख्म: तीन दिन से लापता श्रमिक, संसाधनविहीन गोताखोर बेबस तालाब नहीं, 15–20 साल पुरानी पत्थर खदान; गहराई बनी तलाश में सबसे बड़ी बाधा

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जिसे लोग तालाब समझ रहे हैं, वह दरअसल खनिज विभाग से 15–20 वर्ष पूर्व लीज पर लेकर की गई पत्थर खुदाई का छोड़ा हुआ गड्ढा है। यही गड्ढा आज एक गरीब आदिवासी मजदूर के लिए मौत का कारण बन गया और अब प्रशासनिक तैयारी व सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
बोड़ला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत नेउरगांव कला और तरेगांव मैदान के बीच स्थित इसी जलभराव वाले खनन गड्ढे में नहाने गए श्रमिक माहू बैगा (पिता फगनू) के लापता हुए तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक उसका कोई सुराग नहीं मिल सका है।
तालाब नहीं, गहरी खदान—यही सबसे बड़ा खतरा
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार यह स्थान कोई प्राकृतिक तालाब नहीं बल्कि पुरानी पत्थर खदान है, जहां खुदाई बंद होने के बाद सुरक्षा उपायों के बिना पानी भर गया। गहराई अधिक होने और नीचे पथरीली संरचना के कारण तलाश अभियान बेहद जोखिम भरा हो गया है।
संसाधनविहीन गोताखोर, नाकाम तलाश
मौके पर मौजूद गोताखोरों के पास आधुनिक उपकरण, ऑक्सीजन सपोर्ट और गहराई नापने की तकनीक नहीं है। इसी कारण वे पानी में उतरने के बावजूद शव तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
तीन दिन बाद भी तलाश का नतीजा शून्य होना आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर सवाल खड़े करता है।
रविवार की छुट्टी, नहाने गया था मजदूर
जानकारी के अनुसार माहू बैगा पिछले एक महीने से क्षेत्र के एक गुड़ उद्योग में काम कर रहा था। रविवार को उद्योग बंद होने के कारण वह दोपहर करीब 2 बजे पानी में नहाने उतरा और गहरे हिस्से में चला गया।
परिवार पर टूटा कहर
मृतक की पत्नी लक्ष्मी और दो छोटे बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार का इकलौता सहारा लापता हो जाने से जीवनयापन की चिंता और बढ़ गई है। गुड़ उद्योग में काम करने वाले अन्य मजदूरों में भी भय और आक्रोश है।
संवेदनशीलता बनाम हकीकत
बैगा समाज को संवैधानिक रूप से संरक्षित और ‘राष्ट्रपति का दत्तक पुत्र’ कहा जाता है, लेकिन एक गरीब आदिवासी मजदूर की तलाश में पर्याप्त संसाधन तक उपलब्ध न हो पाना व्यवस्था की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करता है।
फिलहाल पुलिस मौके पर मौजूद है और तलाश जारी रहने की बात कही जा रही है, लेकिन खनन से बने इस गहरे जलभराव वाले गड्ढे ने यह साफ कर दिया है कि ऐसे स्थानों को लेकर लापरवाही किस कदर जानलेवा साबित हो सकती है।

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