बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई पर निर्णायक चोट करते हुए कबीरधाम जिले में बाल विवाह मुक्त पंचायत अभियान को व्यापक जन-आंदोलन का रूप दिया जा रहा है। कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा के निर्देश पर महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा मिशन वात्सल्य अंतर्गत जिले भर के विद्यालयों व महाविद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
जिला कार्यक्रम अधिकारी आनंद तिवारी एवं महिला एवं बाल विकास अधिकारी चंचल यादव के मार्गदर्शन में जिला बाल संरक्षण इकाई की टीम ने गुरुकुल पब्लिक स्कूल, कवर्धा में विद्यार्थियों को बाल विवाह के सामाजिक, शैक्षणिक और स्वास्थ्यगत दुष्परिणामों के साथ-साथ कड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों व ग्रामीणों को “बाल विवाह मुक्त पंचायत” बनाने का संकल्प दिलाया गया।
इस अवसर पर QR कोड व ऑनलाइन लिंक के माध्यम से बाल विवाह मुक्त भारत की डिजिटल शपथ दिलाई गई, जिसमें भाग लेने वाले प्रतिभागियों को डिजिटल प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए। विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी ने अभियान को नई ऊर्जा दी।
आउटरीच वर्कर विनय कुमार जंघेल ने बताया कि भारत में बाल विवाह के विरुद्ध पहला कानून वर्ष 1929 (शारदा अधिनियम) में बना था। वर्तमान में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़के की 21 वर्ष निर्धारित है। उल्लंघन पर 2 वर्ष की कठोर कारावास और 1 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।
कार्यक्रम में यह भी जानकारी दी गई कि 16 जनवरी 2025 से ग्राम पंचायत सचिव को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी नियुक्त किया गया है तथा प्रत्येक पंचायत में विवाह पंजीयन रजिस्टर का संधारण अनिवार्य है। वहीं 18 अक्टूबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने बाल विवाह को बच्चों के प्रति क्रूरता की श्रेणी में रखा है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार के बाल विवाह की सूचना तुरंत पंचायत सचिव, संबंधित विभाग, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 या 181 पर दी जा सकती है।
कार्यक्रम में प्राचार्य मनोज कुमार राय, विद्यालय के समस्त कर्मचारी, अविनाश सिंह ठाकुर (परामर्शदाता), धनसाय साहू (वित्तीय सहायता समन्वयक) सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।