कवर्धा जिले में वन्यजीव शिकार का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार कार्रवाई के बावजूद शिकारी बेखौफ नजर आ रहे हैं। ताजा मामले में कवर्धा वनमंडल की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो नग तेंदुआ खाल के साथ 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिससे क्षेत्र में एक बार फिर हड़कंप मच गया है।
वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की इस कार्रवाई में वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो, भोपाल एवं राज्य स्तरीय उड़नदस्ता दल रायपुर से मिली सूचना के आधार पर संयुक्त टीम ने तरेगांव के ग्राम गुडली और कवर्धा परिक्षेत्र के ग्राम चोरभट्टी में दबिश दी। यहां आरोपियों के कब्जे से तेंदुआ खाल, हड्डी और नाखून जैसी अवैध सामग्री बरामद की गई।
गिरफ्तार आरोपियों में संतराम धुर्वे, सुखराम मेरावी, अघनू धुर्वे, सहैततर मरकाम और कनस टेकाम शामिल हैं। पूछताछ में आरोपियों ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि तेंदुआ खाल का उपयोग पूजा-पाठ और तांत्रिक गतिविधियों में किया जा रहा था।
वन विभाग ने सभी आरोपियों के खिलाफ वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें रिमांड पर भेज दिया गया है।
लगातार सामने आ रहे शिकार के मामले
जिले में यह पहला मामला नहीं है। कुछ दिन पहले भोरमदेव अभ्यारण्य में बायसन के शिकार का मामला सामने आया था, वहीं धवाईपानी क्षेत्र में भी शिकार की घटना ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी थी।
लगातार हो रही घटनाएं यह साफ संकेत दे रही हैं कि जिले में शिकारी गिरोह सक्रिय हैं और कार्रवाई के बावजूद इन पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पा रहा है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक वन्यजीव इस तरह शिकारियों के निशाने पर रहेंगे और कब इन पर प्रभावी रोक लग पाएगी।