वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के कवर्धा वनमंडल द्वारा वन संपदा की सुरक्षा और अवैध कटाई पर अंकुश लगाने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में भोरमदेव अभयारण्य (चिल्फी रेंज) एवं कवर्धा वन परिक्षेत्र की संयुक्त टीम ने अवैध लकड़ी परिवहन और भंडारण के विरुद्ध उल्लेखनीय कार्रवाई करते हुए ट्रैक्टर-ट्रॉली सहित लकड़ी जब्त की है।
रात में सतर्कता, त्वरित कार्रवाई
दिनांक 01 अप्रैल 2026 की रात्रि मुखबिर से प्राप्त गुप्त सूचना के आधार पर वन विभाग ने त्वरित रणनीति बनाकर संदिग्ध मार्गों पर घेराबंदी की। वनमंडलाधिकारी के निर्देशन और भोरमदेव के अधीक्षक के मार्गदर्शन में रेंजर चिल्फी के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को रोका, जिसमें भारी मात्रा में लकड़ी लदी हुई थी।
वाहन चालक द्वारा वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने पर भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 41, 42, 52, 55 तथा छत्तीसगढ़ वनोपज (अभिवहन) नियम 2001 के तहत वन अपराध प्रकरण क्रमांक 21694/2 दर्ज कर ट्रैक्टर-ट्रॉली सहित लकड़ी जब्त कर ली गई। जब्त सामग्री को चिल्फी रेंज परिसर में सुरक्षित रखा गया है।
यह कार्रवाई दर्शाती है कि वन विभाग रात के समय भी पूरी सतर्कता के साथ सक्रिय है और किसी भी अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ढाबों पर आकस्मिक जांच, अवैध भंडारण पर रोक
वन्यजीव संरक्षण एवं अवैध कटाई पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से भोरमदेव अभयारण्य चिल्फी एवं कवर्धा वन परिक्षेत्र की संयुक्त टीम ने धवाईपानी क्षेत्र में संचालित होटलों और ढाबों पर आकस्मिक दबिश दी।
जांच के दौरान मुकेश ढाबा से 02 चट्टा तथा सरदारजी ढाबा से 03 चट्टा जलाऊ लकड़ी जब्त की गई। संबंधित व्यक्तियों द्वारा वैध अनुमति प्रस्तुत नहीं किए जाने पर वन अपराध प्रकरण क्रमांक 21614/17 एवं 21614/18 पंजीबद्ध कर नियमानुसार कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है।
यह कदम स्पष्ट संदेश देता है कि वन विभाग केवल जंगल क्षेत्रों में ही नहीं, बल्कि वन उपज के उपयोग और भंडारण पर भी कड़ी निगरानी रख रहा है।
वन संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता
बोडला से धवईपानी मार्ग पर संचालित होटल-ढाबों में लकड़ी उपयोग की लगातार निगरानी की जा रही है। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निस्तार हेतु डिपो से उपलब्ध कराई जाने वाली वैध लकड़ी का ही उपयोग हो और किसी भी प्रकार की अवैध कटाई या भंडारण को तत्काल रोका जाए।
वन विभाग ने आमजन से अपील की है कि वे वन संपदा के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाएं और किसी भी प्रकार की अवैध कटाई, परिवहन या भंडारण की सूचना तत्काल विभाग को दें।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस कदम
लगातार की जा रही इन कार्रवाइयों से यह स्पष्ट है कि कवर्धा वनमंडल वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा को लेकर गंभीर और प्रतिबद्ध है। समय-समय पर की जा रही छापामार कार्रवाई न केवल अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाएगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति समाज में जागरूकता भी बढ़ाएगी।
वन विभाग की सक्रियता से यह भरोसा मजबूत हुआ है कि जंगलों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और भविष्य में भी इस प्रकार की सख्त एवं सतत कार्रवाई जारी रहेगी।