कबीरधाम जिले में इन दिनों अजीबोगरीब हालात देखने को मिल रहे हैं। सरकारी अंग्रेजी और देशी शराब दुकानों के शटर तो खुले हैं, लेकिन बोतलें गायब हैं। पिछले तीन दिनों से जिले की लगभग सभी सरकारी दुकानों में अंग्रेजी और देशी शराब का पर्याप्त स्टॉक नहीं है। हालत यह है कि देशी शराब का काउंटर पूरी तरह बंद पड़ा है और मदिरा प्रेमी खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं।
शाम होते ही दुकानों के बाहर मायूस चेहरों की भीड़ नजर आती है। कोई पूछ रहा है “माल कब आएगा”, तो कोई काउंटर पर झांककर उम्मीद तलाश रहा है। पंडरिया के पाढ़ी रोड स्थित दुकान पर भी यही नजारा है। आबकारी अधिकारी का कहना है कि “ऊपर से पर्याप्त मात्रा में माल नहीं आ रहा है, लगभग पूरे प्रदेश में यही स्थिति है।”
इधर शराब के आदी लोगों की बेचैनी अब जंगलों की ओर बढ़ती दिख रही है। सगोना और छपरी गांव की दिशा में इन दिनों असामान्य हलचल देखी जा रही है। बताया जा रहा है कि महुआ शराब की तलाश में लोग उधर रुख कर रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में अचानक बढ़ी भीड़ चर्चा का विषय बनी हुई है।
दिलचस्प बात यह है कि जहां सरकारी दुकानें खाली हैं, वहीं महुआ की महक ने पुलिस और आबकारी विभाग की सक्रियता भी बढ़ा दी है। सूत्र बताते हैं कि महुआ पर आबकारी से ज्यादा पुलिस की नजर है और इधर-उधर दबिश की खबरें भी सामने आ रही हैं।
शराब संकट ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कबीरधाम में सप्लाई व्यवस्था क्यों लड़खड़ा रही है फिलहाल, सरकारी काउंटर सूने हैं और जंगलों में ‘देसी इंतजाम’ की खोज जारी है। कब तक यह हाल रहेगा, यह तो ऊपर से आने वाले “माल” पर ही निर्भर है।