जिले में राजस्व अभिलेखों में कथित छेड़छाड़ का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। राजस्व पटवारी संघ छत्तीसगढ़, जिला कबीरधाम के जिला अध्यक्ष गेंदूराम मरावी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग, नवा रायपुर को जिलाधीश कबीरधाम के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। ज्ञापन की प्रतिलिपि पुलिस अधीक्षक कबीरधाम एवं प्रांताध्यक्ष, राजस्व पटवारी संघ छत्तीसगढ़ को भी प्रेषित की गई है।
ज्ञापन में ग्राम बरभावर (प.ह.नं. 36, रा.नि.मं. राजानवागांव, तहसील बोडला) स्थित भूमि खसरा नंबर 29/7, रकबा 0.607 हे. का उल्लेख है। यह भूमि श्यामलाल पिता दुकालू (जाति गोंड), ग्राम हरमो के नाम दर्ज थी। नामांतरण क्रमांक MD202425570342800007, आदेश दिनांक 06.06.2025 के अनुसार श्यामलाल के निधन के बाद उनके वारिसान—भागीरथी पिता श्यामलाल सहित 11 अन्य—के नाम दर्ज किए गए थे। 08/09/2025 को डाउनलोड ग्रामवार खसरा सूची में भी यही प्रविष्टि परिलक्षित थी।
लेकिन गिरदावरी प्रकाशन हेतु फसल क्षेत्राच्छादन रिपोर्ट में उक्त खसरे में भूमिस्वामी के रूप में तीजनबाई पति सदाराम (जाति तेली), ग्राम रौचन का नाम दर्ज पाया गया। संघ का आरोप है कि बिना किसी वैधानिक आदेश के यह परिवर्तन “स्वतः” हो गया। हल्का पटवारी ने 14/10/2025 को तत्कालीन तहसीलदार बोडला को सूचना दी, जिस पर तहसीलदार ने ज्ञापन क्रमांक 1603/वाचक-1/तह./2025, दिनांक 15.10.2025 के माध्यम से कलेक्टर (भू-अभिलेख शाखा) कबीरधाम को अवगत कराया।
संघ का कहना है कि लगभग छह माह बाद कलेक्टर कार्यालय (भू-अभिलेख शाखा) द्वारा कारण बताओ नोटिस क्रमांक 440/अ.भू.अ./स्था./2026, दिनांक 15.04.2026 जारी कर हल्का पटवारी से ही संशोधन के कारण पूछे गए, जबकि “भुइयां” सॉफ्टवेयर में बिना सक्षम आदेश के नाम परिवर्तन का कोई विकल्प उपलब्ध नहीं है। धारा 115 के तहत सामान्य त्रुटि सुधार तहसीलदार की स्वीकृति से संभव है, परंतु इस प्रकरण में ऐसा कोई प्रस्ताव/स्वीकृति दर्ज नहीं है।
ज्ञापन में आशंका व्यक्त की गई है कि इस प्रकार का सीधा परिवर्तन सर्वर एक्सेस स्तर पर ही संभव है। संघ ने NIC स्तर से संभावित हस्तक्षेप की जांच की मांग करते हुए कहा कि आदिवासी/पट्टे की भूमि में नियमित नामांतरण संभव न होने के कारण “सीधे परिवर्तन” कराए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
संघ ने इसे एकल प्रकरण न बताते हुए ग्राम रौचन (प.ह.नं. 35) के खसरा नंबर 73/1—जहां खन्तु पिता बरसन (गोंड) के स्थान पर सुदर्शन पिता गोरेलाल का नाम दर्ज होने—और खसरा नंबर 40/1 (शासकीय भूमि) के 40/1 व 40/3 में विभाजन के बाद अतिक्रमणकर्ताओं के नाम भूमिस्वामी के रूप में दर्ज होने का उल्लेख किया है। नाम परिवर्तन, क्षेत्रफल परिवर्तन तथा शासकीय भूमि का निजी दर्ज हो जाना जैसे मामलों को संघ ने गंभीर प्रशासनिक व आपराधिक प्रकृति का बताया है।
प्रतिनिधिमंडल में प्रांतीय सचिव निर्मल साहू, जिला सचिव रविकांत आमदे, पालेश्वर ठाकुर, श्याम साहू, संतोष आमरे, मोनू वर्मा, मनोरमा श्रीवास्तव और रश्मि मिश्रा उपस्थित रहे। संघ ने मांग की है कि मामले की उच्च स्तरीय, तकनीकी व फॉरेंसिक ऑडिट सहित जांच कर दोषियों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि राजस्व अभिलेखों की विश्वसनीयता और भूमि अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।