जनपद पंचायत सहसपुर लोहारा अंतर्गत ग्राम पंचायत बडौदा कला में मनरेगा के तहत स्वीकृत ‘रिटर्निंग वाल’ निर्माण कार्य अब गंभीर सवालों के घेरे में है। कार्य स्थल पर लगे नागरिक सूचना पटल में स्पष्ट अंकित है कि कार्य महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (छ.ग.) के अंतर्गत स्वीकृत है। बोर्ड पर कार्य की प्रारंभ तिथि 24.02.2026 तथा पूर्णता तिथि 25.04.2026 दर्ज है। साथ ही कार्य का नाम, स्वीकृत राशि, तकनीकी सहायक, कार्यक्रम अधिकारी, पंचायत प्रतिनिधियों के नाम और टोल-फ्री नंबर तक अंकित हैं—मानो पारदर्शिता का पूरा दावा पेश किया गया हो।
लेकिन 23 अप्रैल को जब स्थल निरीक्षण किया गया, तो मौके पर सन्नाटा मिला। ग्रामीणों के अनुसार निर्माण कार्य करीब एक सप्ताह पहले ही बंद हो चुका है। यदि कार्य 25 अप्रैल को पूर्ण होना दर्शाया गया है, तो प्रश्न उठता है कि शेष अवधि का कार्य और मजदूरी किस आधार पर दिखाई जा रही है। क्या मस्टरोल में उन दिनों की भी उपस्थिति दर्ज की गई, जब जमीन पर कोई काम ही नहीं चल रहा था।

जानकारी के अनुसार 32 मजदूरों के नाम पर 4 मस्टरोल जारी किए गए हैं। मनरेगा अधिनियम, 2005 की धारा 3 के तहत ग्रामीण परिवारों को 100 दिनों का अकुशल श्रम आधारित रोजगार उपलब्ध कराना अनिवार्य है। संचालन दिशा-निर्देशों में स्पष्ट है कि कार्य मानव श्रम प्रधान होगा और मशीनों का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि ‘रिटर्निंग वाल’ का निर्माण मशीनों से कराया गया। यदि यह तथ्य जांच में सही पाया जाता है, तो यह अधिनियम की मूल भावना के विपरीत और सीधा वित्तीय अनियमितता का मामला बनता है।
नागरिक सूचना पटल पारदर्शिता का प्रतीक होता है—ताकि आम जनता जान सके कि कितना पैसा स्वीकृत हुआ, कितने दिन में कार्य पूरा होना है और कौन अधिकारी जिम्मेदार है। लेकिन जब बोर्ड पर 25 अप्रैल पूर्णता की तिथि अंकित हो और 23 अप्रैल को ही स्थल पर काम बंद मिले, तो यह पारदर्शिता पर सीधा प्रश्नचिह्न है। क्या यह केवल कागजी उपलब्धि दिखाने की कवायद है।

यदि कार्य पूर्व में ही बंद हो चुका था और मस्टरोल जारी रहा, तो यह फर्जी उपस्थिति, कूटरचित दस्तावेज और सरकारी राशि के दुरुपयोग की श्रेणी में आ सकता है। भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 468 (जालसाजी) और 471 (कूटरचित दस्तावेज का उपयोग) के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाने का प्रावधान है। साथ ही छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम और वित्तीय नियमों के तहत संबंधित अधिकारियों—जैसे रोजगार सहायक, तकनीकी सहायक और कार्यक्रम अधिकारी—पर निलंबन, सेवा समाप्ति एवं राशि वसूली की कार्रवाई संभव है।



