कवर्धा। कबीरधाम जिला पंचायत में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के संचालन को लेकर एक बार फिर गंभीर प्रशासनिक सवाल खड़े हो गए हैं। सामने आए दो महत्वपूर्ण पत्रों ने जिला पंचायत की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है। एक ओर वर्ष 2018 में राज्य नरेगा प्रकोष्ठ, रायपुर द्वारा जारी स्पष्ट निर्देश में सहायक प्रोग्रामर की जवाबदेही तय की गई थी, वहीं दूसरी ओर दिसंबर 2025 में जिला पंचायत कबीरधाम द्वारा जारी आदेश में जनपद पंचायत स.लोहारा में कार्यक्रम अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सहायक प्रोग्रामर दिलीप कुमार साहू को सौंप दिया गया। इससे प्रशासनिक निर्णयों की वैधता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पहले पत्र क्रमांक 4644/वि-7/MGNREGA/2018 में राज्य स्तर से स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि यदि स्वीकृत राशि से अधिक व्यय होता है, तो संबंधित कार्यक्रम अधिकारी के साथ-साथ सहायक प्रोग्रामर भी वित्तीय अनियमितता के लिए उत्तरदायी होंगे। पत्र में यह भी साफ कहा गया था कि डेटा एंट्री के बाद सहायक प्रोग्रामर को प्राक्कलन अनुसार व्यय की राशि की जांच करनी होगी और अनियमितता पाए जाने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
लेकिन विडंबना देखिए, जिस पद को निगरानी और तकनीकी सहायता के लिए बनाया गया था, उसी सहायक प्रोग्रामर को कार्यक्रम अधिकारी जैसा प्रशासनिक प्रभार सौंप दिया गया। जिला पंचायत कबीरधाम के आदेश (दिनांक 22/12/2025) में कहा गया कि जनपद पंचायत स.लोहारा में कार्यक्रम अधिकारी के कार्यों के सुचारू संचालन हेतु यह व्यवस्था की गई।
अब बड़ा मुद्दा यह है कि शासन के निर्देश सहायक प्रोग्रामर की सीमित भूमिका तय करते हैं, फिर उसे कार्यक्रम अधिकारी का प्रभार देना नियमों की भावना के विपरीत नजर आता है। यह मामला केवल प्रशासनिक सुविधा तक सीमित नहीं दिखता, बल्कि नियमों की खुली अनदेखी का संकेत देता है।
सूत्रों के अनुसार मनरेगा जैसे संवेदनशील विभाग में वित्तीय स्वीकृति, भुगतान और कार्य अनुमोदन जैसी जिम्मेदारियां अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं। ऐसे में तकनीकी पदस्थ कर्मचारी को प्रशासनिक अधिकार सौंपना हितों के टकराव और वित्तीय अनियमितताओं की आशंका को कई गुना बढ़ा देता है।
मनरेगा संचालन नियम आधारित व्यवस्था से अधिक जुगाड़ आधारित प्रबंधन
फिलहाल इन दस्तावेजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कबीरधाम में मनरेगा संचालन नियम आधारित व्यवस्था से अधिक जुगाड़ आधारित प्रबंधन पर निर्भर नजर आ रहा है। प्रशासन को अब सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करना होगा कि आखिर नियमों से अलग जाकर यह निर्णय किन परिस्थितियों में लिया गया।
(उक्त मामले पर अभी तक किसी प्रकार का आधिकारिक बयान नहीं आया है यदि आता हैं तो उसे भी प्रकाशित किया जाएगा)