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पंडरिया में राशन दुकानों की खुली लूट, विचारपुर में 89 क्विंटल चावल गायब

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 पंडरिया विकासखंड में गरीबों के राशन की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। ग्राम पंचायत विचारपुर की शासकीय उचित मूल्य दुकान में हुए भौतिक सत्यापन ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली की व्यवस्था को कटघरे में ला खड़ा किया है। ऑनलाइन रिकॉर्ड में जहां 93.16 क्विंटल चावल दर्ज था, वहीं मौके पर महज 4 क्विंटल चावल मिला। यानी 89.16 क्विंटल चावल का हिसाब नहीं मिला। इसके साथ ही 4.73 क्विंटल शक्कर पूरी तरह गायब और 0.57 क्विंटल नमक कम पाया गया। कुल खाद्यान्न की कमी का अनुमानित मूल्य 4,07,435 रुपये बताया गया है।

मामला सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि गरीब हितग्राहियों के हिस्से का इतना बड़ा खाद्यान्न आखिर गया कहां। रिकॉर्ड में स्टॉक मौजूद और गोदाम में राशन नदारद—यह अंतर सार्वजनिक वितरण प्रणाली की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

पंचों के सामने खुली व्यवस्था की पोल

19 अगस्त 2026 को पंचों की मौजूदगी में दुकान का भौतिक सत्यापन किया गया। जांच में ऑनलाइन स्टॉक और वास्तविक उपलब्धता के बीच भारी अंतर सामने आया। चावल की 89.16 क्विंटल कमी अकेले ही मामले की गंभीरता बताने के लिए काफी है। इसके अलावा शक्कर और नमक में भी कमी मिली।

कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, पंडरिया द्वारा 27 अगस्त को जारी कारण बताओ नोटिस में दुकान संचालन से जुड़े जय सतनाम महिला स्व सहायता समूह, टकटोईया की अध्यक्ष दर्पण बाई बघेल, सचिव शशि प्रभा धुर्वे और विक्रेता संतोष बघेल से जवाब मांगा गया है।

महिला समूह की आड़ में व्यवस्था पर सवाल

सरकारी राशन दुकानों के संचालन की जिम्मेदारी भले ही महिला स्व सहायता समूहों को दी जा रही हो, लेकिन विचारपुर का मामला यह सवाल उठाने के लिए मजबूर करता है कि स्टॉक की निगरानी आखिर किस स्तर पर हो रही है। यदि ऑनलाइन रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में इतना बड़ा अंतर लंबे समय तक बना रहा, तो नियमित सत्यापन और निगरानी की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।

89 क्विंटल से ज्यादा चावल कोई छोटी-मोटी स्टॉक कमी नहीं है। इतनी बड़ी मात्रा के गायब होने का वास्तविक कारण जांच में सामने आना जरूरी है। हितग्राहियों को वितरण हुआ तो उसका रिकॉर्ड कहां है। यदि वितरण नहीं हुआ तो खाद्यान्न कहां गया। और यदि स्टॉक कहीं और खपाया गया तो जिम्मेदार कौन है। इन सवालों के जवाब अब प्रशासन को तलाशने होंगे।

पंडरिया की दूसरी दुकानों पर भी उठी जांच की मांग

विचारपुर में स्टॉक की यह स्थिति सामने आने के बाद पंडरिया विकासखंड की अन्य शासकीय उचित मूल्य दुकानों की भी जांच की जरूरत महसूस होने लगी है। आखिर कितनी दुकानों में ऑनलाइन रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक का मिलान हुआ है। कितनी दुकानों का भौतिक सत्यापन नियमित रूप से किया गया और कितनी दुकानों में स्टॉक की कमी मिली—इन आंकड़ों को सार्वजनिक करने से व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ सकती है।

SDM ने दिखाई सख्ती, अब कार्रवाई की बारी

एसडीएम पंडरिया ने संबंधितों को दो दिन के भीतर उपस्थित होकर समाधानकारक जवाब देने के निर्देश दिए हैं। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर निलंबन, 4,07,435 रुपये की वसूली और FIR जैसी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। नोटिस में छत्तीसगढ़ सार्वजनिक वितरण प्रणाली नियंत्रण आदेश 2016 की संबंधित कंडिकाओं तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के तहत कार्रवाई का उल्लेख भी किया गया है।

अब असली परीक्षा प्रशासन की है। नोटिस जारी होना कार्रवाई की शुरुआत है, अंत नहीं। गरीबों के हिस्से का 89.16 क्विंटल चावल और हजारों रुपये मूल्य की शक्कर-नमक की कमी का पूरा हिसाब सामने आना चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि स्टॉक में इतनी बड़ी कमी के बावजूद निगरानी तंत्र को इसकी भनक पहले क्यों नहीं लगी।

विचारपुर की दुकान ने पंडरिया की राशन व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब जरूरत केवल एक दुकान पर कार्रवाई की नहीं, बल्कि पूरे विकासखंड की उचित मूल्य दुकानों के स्टॉक का सघन सत्यापन कर जवाबदेही तय करने की है। गरीबों के राशन पर किसी भी स्तर की कथित सेंधमारी को केवल कागजी नोटिस से नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई से जवाब देना होगा।

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