कवर्धा। सर्व यादव समाज कबीरधाम के तत्वावधान में शनिवार को पारंपरिक गोविंदा उत्सव श्रद्धा, उत्साह और सांस्कृतिक उल्लास के साथ मनाया गया। शहर में निकली भव्य शोभायात्रा में ‘जय यादव-जय माधव’ के जयघोष गूंजते रहे। राऊत नाचा, अखाड़ा प्रदर्शन, मटकी फोड़ और आकर्षक झांकियों ने आयोजन को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा योग्य सांस्कृतिक स्वरूप प्रदान किया।
सर्व यादव समाज के मीडिया प्रभारी संजय यादव ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत श्री राधाकृष्ण बड़े मंदिर में हवन-पूजन के साथ हुई। इसके बाद दही लूट में शामिल सदस्यों ने खेड़ा पति हनुमान मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। दोपहर में अतिथियों ने विधिवत पूजा-अर्चना कर शोभायात्रा को रवाना किया। शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए पुनः श्री राधाकृष्ण बड़े मंदिर पहुंची, जहां इसका समापन हुआ।
31 गोपी मटकी और 81 यादव टोलियों ने बढ़ाया उत्साह
संजय यादव के अनुसार इस वर्ष गोविंदा उत्सव में 31 गोपी मटकी रखी गईं, जबकि 81 यादवों की टोलियों ने मटकी फोड़ प्रदर्शन में हिस्सा लिया। सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए मटकी की ऊंचाई 20 फीट से अधिक नहीं रखी गई। मटकी फोड़ने के दौरान युवाओं में जबरदस्त उत्साह दिखाई दिया और बड़ी संख्या में नागरिक आयोजन देखने उमड़े।
इस वर्ष तालाब में तैयार की गई नई झांकी विशेष आकर्षण रही। झांकी देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटी। वहीं यादव समाज की पारंपरिक संस्कृति और लोककला को राऊत नाचा तथा अखाड़ा दलों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से जीवंत किया। महिला यादव समाज की पदाधिकारियों की सहभागिता ने भी आयोजन की भव्यता बढ़ाई।
इन मार्गों से गुजरी भव्य शोभायात्रा
शोभायात्रा श्री राधाकृष्ण बड़े मंदिर से प्रारंभ होकर करपात्री चौक, शीतला मंदिर चौक, हरदेव लाला, ठाकुर पारा, सराफा लाइन, दर्री पारा, ठाकुर देव चौक, नवीन बाजार, गांधी मैदान, वीर स्तंभ चौक, गायत्री मंदिर चौक, अंबेडकर पार्क, राजमहल चौक, बूढ़ा महादेव मंदिर, कचहरी पारा और यूनियन चौक होते हुए पुनः श्री राधाकृष्ण बड़े मंदिर पहुंची।
वहीं शीतला मंदिर से मटकी रखने वाली गोपियों की टोली मुख्य बाजार और सराफा लाइन होते हुए गांधी मैदान पहुंची। पूरे मार्ग में राऊत नाचा, अखाड़ा प्रदर्शन और महिला यादव समाज की सहभागिता ने आयोजन को सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाया।
सर्व यादव समाज कबीरधाम की ओर से संजय यादव ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले शहर एवं जिलेवासियों के प्रति आभार जताया। गोविंदा उत्सव ने धार्मिक आस्था के साथ यादव समाज की सांस्कृतिक विरासत, लोकपरंपरा, सामाजिक एकजुटता और सामुदायिक सहभागिता की प्रभावशाली झलक प्रस्तुत की।