कवर्धा। धान खरीदी व्यवस्था में टोकन, वास्तविक आवक और खरीदी अभिलेखों के बीच अंतर का एक मामला आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित जुनवानी जंगल में सामने आया है। किसान गणेश पिता मंगल नेताम ने 9 अक्टूबर 2026 को सहकारिता विभाग में शिकायत दर्ज कराते हुए धान विक्रय की राशि से 36,312 रुपये की कथित अतिरिक्त ऋण वसूली और शेष भुगतान नहीं होने का आरोप लगाया है। लेकिन किसान के दावे और उपार्जन केंद्र में उपलब्ध खरीदी पावतियों के आंकड़ों में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। किसान ने जहां 229.60 क्विंटल धान बिक्री का दावा किया है, वहीं समिति के अभिलेखों में केवल 39 बोरी यानी 15.60 क्विंटल धान की खरीदी दर्ज है। इस तरह दोनों आंकड़ों के बीच 214 क्विंटल का अंतर सामने आया है।
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार किसान कोड TF5700300100884 के तहत 7 जनवरी 2026 को धान खरीदी की गई थी। उपार्जन केंद्र की दो पावतियों में एक पावती में 38 बोरी पतला धान का वजन 15.20 क्विंटल और राशि 36,312.80 रुपये दर्ज है। दूसरी पावती में एक बोरी मोटा धान का वजन 0.40 क्विंटल और राशि 947.60 रुपये दर्ज है। इस प्रकार कुल 39 बोरी धान का वजन 15.60 क्विंटल और कुल विक्रय राशि 37,260.40 रुपये दर्ज है। इसके विपरीत किसान की शिकायत में 229.60 क्विंटल धान बिक्री और 5,44,537.20 रुपये की कुल राशि का उल्लेख किया गया है। दोनों राशियों में 5,07,276.80 रुपये का अंतर है।
उपार्जन केंद्र प्रभारी के अनुसार, खरीदी के दौरान वे किसी कार्य से केंद्र से बाहर थे। उनकी अनुपस्थिति में मौजूद कर्मचारियों ने दूसरे किसान के धान की तौल भी गणेश नेताम के नाम पर दर्ज कर दी थी। वापस लौटने के बाद जब खरीदी का मिलान किया गया तो संबंधित किसान के नाम पर वास्तविक आवक केवल 39 बोरी ही पाई गई। प्रभारी का कहना है कि किसान के ट्रैक्टर से धान की आवक भी केवल एक बार हुई थी। इसके बाद संबंधित किसानों को बुलाकर स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया गया, लेकिन किसान उपस्थित नहीं हुआ।
समिति प्रबंधन का कहना है कि उपार्जन केंद्र के उपलब्ध दस्तावेजों और अभिलेखों में 39 बोरी धान की खरीदी दर्ज है तथा संबंधित पावतियों पर किसान के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं। ऐसे में शिकायत में किए गए 229.60 क्विंटल धान बिक्री के दावे और समिति के रिकॉर्ड के बीच अंतर का स्पष्ट होना जरूरी है।
मामले का दूसरा पहलू ऋण वसूली से जुड़ा है। किसान ने शिकायत में वर्ष 2025-26 के दौरान 1,10,125 रुपये ऋण जमा करने के बावजूद 36,312 रुपये की अतिरिक्त वसूली किए जाने का आरोप लगाया है। साथ ही ऋण पुस्तिका में 73,813 रुपये बकाया दर्शाए जाने और शेष धान विक्रय राशि का भुगतान नहीं होने की बात कही है। हालांकि इस संबंध में वास्तविक ऋण खाते, लिंकिंग और बैंक भुगतान का मिलान होना बाकी है।
गौरतलब है कि धान खरीदी 7 जनवरी 2026 को हुई, जबकि शिकायत 9 अक्टूबर 2026 को दर्ज कराई गई। करीब नौ महीने बाद सामने आई शिकायत ने पूरे मामले को जांच के दायरे में ला दिया है। अब सहकारिता विभाग के लिए जरूरी है कि टोकन रिकॉर्ड, तौल पर्ची, आवक रजिस्टर, खरीदी पावती, किसान के हस्ताक्षर, ऋण खाते और बैंक भुगतान का निष्पक्ष परीक्षण कराया जाए। जांच से ही स्पष्ट होगा कि 214 क्विंटल का अंतर किस वजह से सामने आया और कथित कर्मचारी त्रुटि के लिए जिम्मेदार कौन है। फिलहाल 229 क्विंटल के दावे के सामने 39 बोरियों का अभिलेख पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज बन गया है।