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सुरक्षा कानून कागज़ों में, मजदूर ज़मीन पर मर रहे! अनिमेष इस्पात हादसे में श्रम विभाग और उद्योग विभाग की कार्यशैली पर सवाल, फैक्ट्री अधिनियम के नियमों की खुली अनदेखी

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अनिमेष इस्पात, ढाबाडिह में श्रमिक आशुतोष ध्रुव (राजा) की दर्दनाक मौत ने एक बार फिर यह उजागर कर दिया है कि छत्तीसगढ़ के औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिक सुरक्षा कानून केवल फाइलों तक सीमित रह गए हैं। हादसे के बाद न सिर्फ फैक्ट्री प्रबंधन, बल्कि श्रम विभाग और उद्योग विभाग (महाप्रबंधक उद्योग) की कार्यशैली भी गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है।
फैक्ट्री अधिनियम 1948 और नियमों की अनदेखी का आरोप
श्रम विशेषज्ञों के अनुसार, फैक्ट्री अधिनियम 1948 के तहत—
धारा 7A: नियोक्ता का दायित्व है कि कार्यस्थल को सुरक्षित बनाए
धारा 21 से 41: मशीनों, खतरनाक प्रक्रियाओं और कार्यस्थल सुरक्षा के स्पष्ट प्रावधान
धारा 88: किसी भी गंभीर दुर्घटना की तत्काल सूचना श्रम विभाग को देना अनिवार्य
इसके बावजूद आरोप है कि फैक्ट्री परिसर में पर्याप्त सुरक्षा उपकरण, चेतावनी संकेत, प्रशिक्षण और निगरानी व्यवस्था का अभाव था। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या इन नियमों की नियमित जांच श्रम निरीक्षकों द्वारा की गई थी या नहीं।
श्रम विभाग और उद्योग विभाग की भूमिका पर सवाल
स्थानीय लोगों और श्रमिक संगठनों का कहना है कि यदि श्रम विभाग द्वारा समय-समय पर प्रभावी निरीक्षण किया जाता और महाप्रबंधक उद्योग विभाग द्वारा लाइसेंस, सुरक्षा मानकों और अनुपालन की सख्त समीक्षा होती, तो यह हादसा टल सकता था।
आरोप है कि—
निरीक्षण सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गए
सुरक्षा ऑडिट और अनुपालन रिपोर्ट कागज़ों में सिमट गई
बार-बार हुई दुर्घटनाओं के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई
पहले भी हुए हादसे, फिर भी सख्ती नदारद
ग्रामीणों का कहना है कि अनिमेष इस्पात ढाबाडिह में पहले भी कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। हर बार जांच के नाम पर खानापूर्ति की गई और नतीजा शून्य रहा।
यही वजह है कि आज एक और श्रमिक को अपनी जान गंवानी पड़ी।
कानून कहता है—जवाबदेही तय हो
श्रम कानूनों के अनुसार—
सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर फैक्ट्री प्रबंधन पर आपराधिक कार्रवाई और जुर्माना
गंभीर लापरवाही पर फैक्ट्री का संचालन निलंबित तक किया जा सकता है
मृतक के परिवार को उचित मुआवजा और क्षतिपूर्ति देना अनिवार्य है
लेकिन सवाल यह है कि क्या इन प्रावधानों को जमीन पर लागू किया जाएगा, या फिर यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा?
गांव में आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी
ग्राम कोयलारी सहित आसपास के गांवों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि
दोषियों पर सख्त कार्रवाई
मृतक परिवार को मुआवजा
और फैक्ट्री में सुरक्षा व्यवस्था की सख्त समीक्षा
नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।
राष्ट्रीय सवाल
यह सिर्फ बलौदाबाजार की घटना नहीं, बल्कि पूरे देश के औद्योगिक क्षेत्रों का कड़वा सच है—
जब तक श्रम विभाग और उद्योग विभाग की निगरानी कड़ी नहीं होगी, तब तक मजदूरों की जान यूं ही जाती रहेगी।
अब देश यह देख रहा है कि क्या कानून जागेगा,
या फिर एक और श्रमिक की मौत सिर्फ आंकड़ा बनकर रह जाएगी।

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