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सौम्या ने घोटाले का राज बताया, भूपेश यहां छापे, रविंद्र चौबे और अकबर गायब

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रायपुर  ED छापे से भूपेश बघेल परेशान है, तो वहीं कांग्रेसी मन ही मन गद गद हो रहे है, क्योंकि जब बघेल सत्ता संभाल रहे थे तब कांग्रेसियों की पूछ परिख तक नहीं हो रही थी, सीएम निवास के गेट तक पहुंचना मुश्किल हो गया था, सिर्फ बघेल के चार से पांच करीबियों के ईशारे पर दोगले कांग्रेस नेताओं के काम ठीक-ठाक हो रहे थे, घोटाले कर इन सबने जमकर पैसा भी कमाया. जिसका नतीजा आज सामने आ रहे है. इस वक्त भूपेश निवास में मोहम्मद अकबर और रवींद्र चौबे के छोड़ सभी नेता मौजूद है.

सौम्या जो सुपर सीएम थी भूपेश राज में
बड़े बड़े आईएएस आईपीएस सौम्या के सामने कुछ नहीं बोल पाते थे, जीतने भी घोटाले हुए इन सब के कारनामे सौम्या के पास थी, जैसे कोयला, DMF शराब और कई घोटाले शामिल है, घोटालों में कांग्रेस के विधायक नेता फंसे हुए है. मुख्य मुद्दा कमीशन खोरी का था, सबकी कमीशन बंधी हुई थी, एक कागज में हिसाब किताब लिखकर हर महीने कमीशन मंत्री , विधायक और नेताओं तक पहुंच जाता था.
सूर्यकाँत तिवारी – सूर्यकाँत तिवारी बड़ा कारोबारी है, इसका संबंध दोनों पार्टी के नेताओं से रहा है, मौसम की तरह ये सरकार बदलते ही अपना पैठ जमा ही लेता था, फ़िलहाल ये जेल में बंद है. वर्तमान में इन्हे ACB और EOW रिमांड में लिए हुए है, पूछताछ हो रही है, कई राज खुल रहे है. आज बघेल यहाँ पड़े छापे से यह तो तय हो गया कि सत्ता में रहते बघेल ने खूब पैसे कमाए, घोटालों में बेटे चैतन्य का भी हाथ रहा है, चैतन्य के मोबाइल से ED ने कई अहम मैसेज स्टोर कर लिए है.
भूपेश बघेल ने अपने ऊपर हुए हमले की जांच को पार्टी के साथ जोड़कर राजनीतिक पैतरा खेला. और पार्टी को अपने साथ खड़े करने की कोशिश कर रहे भूपेश बघेल। और कांग्रेस पार्टी के लिए अपने आप को समर्पित और बलिदानी नेता के रूप में नाकाम कोशिश कर रहे हैं. भाजपा के एक नेता ने कहा – कि वे अपने ही प्रदेश में चारो खाने चित होने के पश्चात अब पंजाब में भी कांग्रेस पार्टी का बंटाधार करेंगे. भूपेश बघेल अपने ही निर्वाचन क्षेत्र की लोकसभा में भी पार्टी की हार दिलाई है. ये भी भूलना नहीं चाहिए की लगातार जिला पंचायत से लेकर सभी चार चुनाव कांग्रेस पार्टी भूपेश बघेल के कारण ही हारी है.और भूपेश बघेल कोई बहुत बड़े जादूगर नेता नहीं है. जिसके लिए कांग्रेस पार्टी अपनी राजनीतिक दांव लगाकर भूपेश के साथ खड़े होंगे. दिल्ली के बड़े नेताओं को सोचना होगा कि वे अपने ही प्रदेश में सभी चुनाव हराने वाले के साथ कैसे साथ खड़े हो सकते हैं ।

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