एक ओर कबीरधाम जिला जल संकट की कगार पर है, तो दूसरी ओर प्रशासन के स्पष्ट प्रतिबंध के बावजूद जिले में बोर खनन का अवैध कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। जिला कलेक्टर द्वारा 9 अप्रैल को पूरे जिले में नलकूप खनन पर रोक लगाने का आदेश जारी किया गया था, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में दर्जनों बोर खनन वाहन अब भी सक्रिय हैं। ग्रामीणों द्वारा लगातार सोशल मीडिया और कॉल के माध्यम से शिकायतें की जाती रही हैं, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
पहली बार हुई कार्रवाई, उजागर हुआ सिस्टम का सच केशलमरा ग्राम में अवैध बोर खनन की सूचना पर पहुंचे नायब तहसीलदार संजय मोध्या ने कर्नाटक नंबर की गाड़ी (KA 01 M 7288) को मौके पर पकड़ा और कुंडा थाना के सुपुर्द किया। यह पहली बार है जब प्रशासन ने किसी वाहन को मौके पर पकड़ा और वैधानिक कार्रवाई की शुरुआत हुई।
रात के अंधेरे में होता अवैध खनन खनन माफिया दिन के समय अपने वाहन को पेट्रोल पंप या अन्य सुरक्षित स्थलों पर छिपा देते हैं और रात में गुपचुप तरीके से बोर खनन का कार्य शुरू करते हैं। इससे न केवल प्रशासन को चुनौती दी जा रही है, बल्कि जल स्रोतों का भी तेजी से दोहन हो रहा है।
किसानों के साथ धोखा: अनुमति के नाम पर वसूली खनन एजेंट किसानों से न केवल मनमानी कीमत वसूलते हैं, बल्कि अधिकारियों को “भेंट” देने के नाम पर अतिरिक्त पैसे भी ऐंठते हैं। आर्थिक रूप से पहले से ही जूझ रहे किसान इस दोहरी मार से त्रस्त हैं।
प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल हालांकि जिला कलेक्टर का आदेश स्पष्ट है, लेकिन जब तक निगरानी और कार्रवाई में कठोरता नहीं दिखाई जाती, तब तक यह अवैध धंधा रुकने वाला नहीं है।
अब ज़रूरत है सिस्टम को जगाने की कबीरधाम जैसी जल संकटग्रस्त जगहों पर यदि बोर खनन धंधा बन जाए, तो यह सिर्फ प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के जल अधिकारों पर हमला है। अब वक्त है कि जिला और राज्य स्तर पर इस मामले को गंभीरता से लिया जाए।