जिले में 5 जून से शुरू हो रहे ‘एक पेड़ माँ के नाम 2.0’ अभियान को भले ही पर्यावरण संरक्षण और जनसहभागिता का नया युग बताया जा रहा हो, लेकिन कई जानकारों और ग्रामीणों का मानना है कि यह भी पहले की तरह एक और घोषणात्मक कार्यक्रम बनकर रह सकता है।
कलेक्टर गोपाल वर्मा ने इस अभियान को धरती और माँ के प्रति आभार का प्रतीक बताया है, पर पिछली बार चले इस अभियान के पौधों की देखरेख और बचाव की कोई ठोस योजना सामने नहीं आई थी। इस बार भी यदि वृक्षारोपण महज औपचारिकता बनकर रह गया तो यह जनसहभागिता की बजाय जन मोहभंग का कारण बन सकता है।
प्रधानमंत्री जनमन योजना और विकसित कृषि संकल्प अभियान की समीक्षा तो की जा रही है, लेकिन ज़मीन पर इनके ठोस परिणाम अब तक नज़र नहीं आए हैं। विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए घोषित सड़क निर्माण कार्य भी धीमी गति से चल रहे हैं।