तीन माह का खाद्यान्न एक साथ वितरित करने की योजना, कई दुकानों में स्टॉक की कमी और वितरण में अनियमितता की शिकायते
कवर्धा
प्रदेश सरकार द्वारा 1 जून से 7 जून तक “चावल उत्सव” आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत कवर्धा जिले के राशन कार्डधारी हितग्राहियों को एक साथ तीन माह का खाद्यान्न (मुख्य रूप से चावल) वितरित किया जाना है। यह योजना राज्य के खाद्य सुरक्षा के तहत जरूरतमंदों को राहत पहुँचाने की एक बड़ी पहल के रूप में देखी जा रही है।
सरकारी निर्देशानुसार इस उत्सव में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और पंचायत पदाधिकारियों की भागीदारी अनिवार्य की गई है। कार्यक्रम को पारदर्शी और जनसरोकार से जोड़ने के लिए प्रत्येक उचित मूल्य की दुकान में निरीक्षण, स्टॉक की जांच, बिक्री पंजी और आवक-जावक रजिस्टर के सत्यापन की भी व्यवस्था की गई है।
हालांकि, चावल उत्सव की इस उत्साही तैयारी के बीच जमीनी सच्चाई कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
कवर्धा जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार शिकायतें सामने आती हैं कि हितग्राहियों को बायोमैट्रिक सत्यापन (अंगूठा लगवाने) के बावजूद चावल नहीं दिया जाता है। कुछ दुकानों में स्टॉक की भारी कमी है, जबकि कई जगह विक्रेताओं द्वारा नियमों का उल्लंघन कर खाद्यान्न वितरण में अनियमितता बरती जा रही है।कुछ जगहों पर नियमानुसार वितरण किया जा जाता हैं।
हितग्राहियों का कहना है कि दुकानों में पहले से ही स्टॉक कम है, और उन्हें कहा जाता है कि “सिस्टम नहीं चल रहा” या “आपका अंगूठा मैच नहीं हो रहा”, जबकि कुछ ही देर बाद दूसरों को चावल दे दिया जाता है। ऐसा दुकान महीने के 20 तारिक के बाद अगले माह का आबंटन आने के बाद खुलता है।
सरकारी कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा है कि वे प्रत्येक उचित मूल्य की दुकान पर पहुँचकर न केवल स्टॉक और वितरण की जांच करें, बल्कि हितग्राहियों से सीधे संवाद कर मूलभूत सुविधाओं—जैसे राशन कार्ड, बायोमैट्रिक प्रक्रिया, दुकान खुलने का समय और व्यवहार—के बारे में जानकारी लें।
यदि इस आयोजन को सख्त निगरानी और पारदर्शिता के साथ अंजाम दिया जाए, तो यह न केवल जरूरतमंदों को राहत देगा, बल्कि जनविश्वास भी मजबूत करेगा।