छत्तीसगढ़ में धार्मिक आस्था के नाम पर बड़ा आर्थिक फर्जीवाड़ा, पीड़िता की शिकायत पर रोहतक से आरोपी गिरफ्तार
धार्मिक विश्वास और मानसिक अस्थिरता का फायदा उठाकर एक स्वयंभू पंडित द्वारा महिला से लाखों रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में एक महिला से पूजा-पाठ और ग्रह शांति के नाम पर लगभग 36.66 लाख रुपये की ठगी की गई। शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए दुर्ग पुलिस ने आरोपी ‘पंडित’ कुलदीप महाराज को हरियाणा के रोहतक से गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
आस्था को बनाया शोषण का माध्यम
प्राप्त जानकारी के अनुसार पीड़िता पल्लवी जायसवाल, निवासी जुनवानी, सुपेला, नियमित रूप से नेहरू नगर स्थित कालीबाड़ी मंदिर में पूजा-अर्चना हेतु जाती थीं। मंदिर के स्थानीय पुजारी को उन्होंने अपनी आर्थिक और शारीरिक समस्याओं के बारे में अवगत कराया। इस पर पुजारी ने उन्हें हरियाणा के रोहतक निवासी एक “विद्वान पंडित” कुलदीप महाराज से संपर्क करने की सलाह दी, जो कथित रूप से विशेष तांत्रिक और धार्मिक अनुष्ठानों से समस्याओं का समाधान करता है।
दो साल तक चलता रहा ठगी का खेल
जनवरी 2023 में पल्लवी की कुलदीप महाराज से पहली मुलाकात हुई। आरोपी ने उन्हें आश्वासन दिया कि विशेष पूजा, हवन, और ग्रह शांति अनुष्ठान से उनकी सारी समस्याएं समाप्त हो जाएंगी, लेकिन इसके लिए नियमित दक्षिणा देना अनिवार्य होगा। इसके बाद पीड़िता ने 18 जनवरी 2023 से 8 अप्रैल 2025 तक नगद, बैंक ट्रांसफर और अन्य माध्यमों से लगभग 36.66 लाख रुपये कुलदीप महाराज को अर्पित किए।
आरोपित ने महिला को इस हद तक मानसिक रूप से प्रभावित कर दिया कि उसने अपने निजी फ्लैट को भी गुरु जी को समर्पित करने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया था। परंतु जब लाखों रुपये खर्चने के बाद भी कोई समाधान नहीं हुआ, तो पल्लवी जायसवाल को ठगी का संदेह हुआ और उन्होंने सुपेला थाने में विस्तृत लिखित शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने तत्परता से की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए दुर्ग पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की। लेन-देन के बैंक दस्तावेजों, कॉल रिकॉर्ड्स, और साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट हो गया कि मामला संगठित ठगी से जुड़ा है। इसके पश्चात विशेष पुलिस टीम ने हरियाणा के रोहतक जाकर आरोपी को गिरफ्तार किया और उसे छत्तीसगढ़ लाया गया। अदालत में प्रस्तुत करने के बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
शिक्षा और जनजागरूकता की आवश्यकता
यह मामला समाज में धार्मिक आस्था के नाम पर हो रहे शोषण और ठगी की एक चिंताजनक तस्वीर पेश करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि साक्षरता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की कमी के चलते ऐसे स्वघोषित बाबाओं और तांत्रिकों को बढ़ावा मिलता है। खासतौर पर महिलाओं और मानसिक रूप से कमजोर लोगों को निशाना बनाया जाता है।
शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि स्कूली शिक्षा में तर्क, विवेक, और वैज्ञानिक सोच को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है, जिससे धार्मिक आस्था का उपयोग सकारात्मक दिशा में हो और उसे अंधविश्वास में तब्दील न किया जा सके।
क्या कहती है पुलिस
दुर्ग पुलिस अधीक्षक ने मामले को गंभीर मानते हुए कहा है कि इस तरह के अपराधों पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी। यदि किसी और व्यक्ति को भी ऐसी ठगी का संदेह हो तो वे बेहिचक पुलिस को जानकारी दें। पुलिस ने अपील की है कि धार्मिक समाधान के नाम पर आर्थिक लेन-देन करते समय पूरी सतर्कता बरतें।
यह मामला केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और आत्मनिर्भरता की कमी को भी उजागर करता है। इससे सबक लेते हुए समाज को चाहिए कि धार्मिक परंपराओं और व्यक्तिगत समस्याओं के बीच संतुलन बनाए रखते हुए शिक्षा और जागरूकता को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाए।