जिले में यूरिया, डीएपी और पोटाश की जमकर कालाबाजारी हो रही है। किसानों को न्यूनतम खुदरा मूल्य (MRP) से अधिक दर पर खाद बेचा जा रहा है। यही नहीं, पॉस मशीन (PoS Machine) से भी हेराफेरी कर किसानों के नाम पर अतिरिक्त खाद की बिक्री दर्शाकर सरकारी व्यवस्था को पंगु बना दिया गया है।
डिस्टिब्यूटर खुद बना ‘खाद माफिया’
जिले में अधिकृत डिस्टिब्यूटर छोटे खुदरा व्यापारियों को न तो खाद दे रहे हैं और न ही “O-फॉर्म” जारी कर रहे हैं, जिससे छोटे दुकानदार वैध रूप से खाद खरीद ही नहीं पाते। यह रवैया स्पष्ट करता है कि बड़ी मछलियाँ खुद कालाबाजारी में लिप्त हैं। कुछ डिस्टिब्यूटर तो यहां तक मध्यप्रदेश के किसानों के आधार कार्ड पर भी खाद बेच रहे हैं, जबकि स्थानीय किसान खाद के लिए भटकते रह जाते हैं।
विभाग की भूमिका संदिग्ध
जिले के कई गोदामों में बड़ी मात्रा में खाद का स्टॉक दर्शाया जा रहा है, लेकिन जब किसान या छोटे दुकानदार खाद लेने पहुंचते हैं, तो उन्हें यह कहकर मना कर दिया जाता है कि स्टॉक समाप्त हो चुका है। सवाल यह उठता है कि अगर स्टॉक है, तो वितरण क्यों नहीं हो रहा? यह संदेह और भी गहरा जाता है जब POS मशीन में एक किसान के नाम पर दो बोरी की जगह चार बोरी का बिल जनरेट किया जाता है।
गोदाम और POS मशीन की तत्काल जांच हो
जिले की किसान और कृषि विभाग से मांग कर रही है कि जिले के सभी गोदामों और POS मशीनों का भौतिक सत्यापन कराया जाए। यह भी देखा जाए कि स्टॉक और वितरण में कितनी समानता है और कहां पर हेराफेरी हो रही है।
कोटवार से मुनादी कराए कृषि विभाग यह भी आवश्यक है कि कृषि विभाग गांव-गांव में कोटवारों के माध्यम से मुनादी करवाए कि कोई भी किसान अधिक दर पर खाद न खरीदे। यदि कोई ऐसा कर रहा है या उससे कराया जा रहा है तो वह तत्काल कृषि विभाग को सूचित करे। इसके लिए एक सार्वजनिक हेल्पलाइन नंबर जारी किया जाना चाहिए ताकि शिकायतें दर्ज हो सकें।
ब्लैक मार्केटिंग पर रोक की आवश्यकता
यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्र सरकार द्वारा तय की गई कीमतों पर खाद न देकर किसानों को लूटा जा रहा है। खाद वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए कृषि विभाग को कठोर कदम उठाने होंगे।
बड़ी सवाल
🔸 गोदामों की जाँच कौन करेगा।
🔸 POS मशीन में दर्शाए गए स्टॉक का सही वितरण क्यों नहीं हो रहा।
🔸 मध्यप्रदेश के किसानों को जिले की खाद आखिर कैसे मिल रही है।
🔸 और छोटे व्यापारियों को O-फॉर्म क्यों नहीं दिए जा रहे हैं ।
छत्तीसगढ़ के किसानों को राहत देने और सिस्टम में पारदर्शिता लाने के लिए अब कड़ी कार्यवाही और जनजागरण की आवश्यकता है। वरना खाद माफिया और अफसरशाही की साठगांठ में सबसे बड़ा नुकसान देश के अन्नदाता को उठाना पड़ेगा।