राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले बैगा समुदाय में शोक की लहर
कवर्धा। जिले के कुकदूर थाना अंतर्गत आने वाले आदिवासी बाहुल्य गांव बाहपानी में मंगलवार शाम एक दर्दनाक हादसा हो गया। जंगल में भाजी (चरोटा) तोड़ने गईं बैगा जनजाति की दो महिलाएं आकाशीय बिजली की चपेट में आकर मौके पर ही मौत का शिकार हो गईं। घटना के बाद पूरे गांव और बैगा समुदाय में शोक की लहर है।
मृतकों की पहचान तिहरी बाई और रामबाई के रूप में हुई है, जो आपस में रिश्तेदार थीं और एक ही परिवार से संबंध रखती थीं। बताया जा रहा है कि शाम करीब 5 बजे दोनों महिलाएं जंगल की ओर गई थीं। देर रात तक घर नहीं लौटने पर परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। अगली सुबह दोनों के शव बाहपानी के जंगल में पड़े मिले। सूचना मिलते ही कुकदूर पुलिस मौके पर पहुंची और पंचनामा कर शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया।
प्रदेश में मानसून सक्रिय होने के चलते मौसम विभाग द्वारा लगातार आकाशीय बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया जा रहा है। इसके बावजूद दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में लोगों तक अलर्ट की जानकारी नहीं पहुंचने से ऐसे हादसे थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।
घटना की सबसे मार्मिक बात यह है कि मृतक महिलाएं बैगा जनजाति से थीं, जिन्हें राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र का दर्जा प्राप्त है। यह जनजाति छत्तीसगढ़ की सबसे संवेदनशील और संरक्षित जनजातियों में से एक है, जिनका जीवन जंगल, परंपरा और प्रकृति से जुड़ा हुआ है। उनके लिए जंगल केवल जीवनयापन का माध्यम नहीं, बल्कि सांस्कृतिक अस्तित्व का हिस्सा है।
सरकार और प्रशासन द्वारा बैगा जनजाति के कल्याण के लिए योजनाएं जरूर चलाई जाती हैं, परंतु इस तरह की घटनाएं यह सवाल खड़ा करती हैं कि क्या जागरूकता, सुरक्षा और अलर्ट प्रणाली वास्तव में अंतिम व्यक्ति तक पहुंच पा रही है?
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि बैगा समुदाय के प्रति विशेष संवेदना दिखाते हुए पीड़ित परिवार को तत्काल सहायता प्रदान की जाए और भविष्य में ऐसे हादसों की रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।