जिला अस्पताल (DH) कबीरधाम में चल रही सुनने में अक्षम बच्चों की स्पीच थेरेपी में एक बच्ची को फोटो पहचान के माध्यम से भाषा एवं संप्रेषण कौशल सिखाया जा रहा है। चित्र में बच्ची ध्यानपूर्वक विभिन्न चेहरों की पहचान कर रही है, जो स्पीच और श्रवण विकास के लिए की जा रही थैरेपी का हिस्सा है।
विशेषज्ञों की देखरेख में ऐसे बच्चों को नियमित अभ्यास के माध्यम से ध्वनि पहचान, प्रतिक्रिया देना, और बोलने की प्रक्रिया सिखाई जाती है। बच्ची के सामने रखे गए फोटो कार्ड्स से उसे चेहरा पहचानना, नाम या भाव बताना सिखाया जा रहा है—जो स्पीच थैरेपी की एक अहम तकनीक है।
सुनने में अक्षम बच्चों के लिए जिला अस्पताल कबीरधाम में इस तरह की पहल न केवल सराहनीय है, बल्कि उनके भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में एक प्रभावी कदम भी है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना और सामान्य सामाजिक जीवन जीने में सक्षम बनाना है।
( गतिविधि में उपयोग हो रहे रंग-बिरंगे खिलौने और विज़ुअल्स बच्चों की एकाग्रता और संवाद क्षमताओं को विकसित करने में मदद करते हैं।)