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छत्तीसगढ़ का पहला जिला बना कबीरधाम: मैदानी इलाकों से लेकर जंगलों तक नि:शुल्क सोनोग्राफी जांच शिविरों का सफल आयोजन

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कवर्धा
स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने के उद्देश्य से कबीरधाम जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने मिलकर जो पहल की है, वह न केवल सराहनीय है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में उदाहरण बन गई है। कबीरधाम राज्य का पहला जिला बन गया है, जहाँ मैदानी और वनवासी क्षेत्रों में जाकर नि:शुल्क सोनोग्राफी जांच शिविर का आयोजन किया गया। यह अभियान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, जिला कबीरधाम (छ.ग.) के निर्देशन में संचालित हुआ।
इस अभियान के तहत 10 जून 2024 से लेकर 9 अक्टूबर 2024 तक जिले के अलग-अलग इलाकों में कुल 12 स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया गया। ये शिविर सिर्फ शहरी या मुख्यालय तक सीमित नहीं रहे, बल्कि दुर्गम आदिवासी और वनवासी क्षेत्रों तक भी पहुंच बनाए। इन शिविरों के माध्यम से कुल 3798 लोगों को चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिला, जिसमें 494 महिलाओं को नि:शुल्क सोनोग्राफी जांच की सुविधा दी गई – जो कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
शिविरों की तिथियां एवं स्थान
10 जून 2024 – तरेगांव
25 जून 2024 – रेंगाखार
10 जुलाई 2024 – चिल्फी
19 जुलाई 2024 – झलमला
27 जुलाई 2024 – बोक्कर खार
5 अगस्त 2024 – कुकदुर
6 अगस्त 2024 – पिपरिया
7 अगस्त 2024 – लोहारा
8 अगस्त 2024 – बोड़ला
7 अक्टूबर 2024 – तरेगांव
8 अक्टूबर 2024 – रेंगाखार
9 अक्टूबर 2024 – पिपरिया
इन शिविरों में सोनोग्राफी जांच के अलावा अन्य सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण, गर्भवती महिलाओं की निगरानी, पोषण एवं रक्त की जांच, शुगर एवं ब्लड प्रेशर की भी जांच की गई। स्थानीय महिलाओं ने विशेष रुचि दिखाते हुए बढ़-चढ़कर शिविरों में भाग लिया।
जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने मोबाइल मेडिकल यूनिट, प्रशिक्षित डॉक्टर, लैब टेक्नीशियन और महिला स्वास्थ्य कर्मियों की टीम के साथ यह सुनिश्चित किया कि प्रत्येक शिविर में हर जरूरतमंद व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधा पहुंचे।
जंगल और पहाड़ों में स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने की अनूठी पहल
कबीरधाम जिले के अधिकांश गांव पहाड़ी और वन क्षेत्रों में बसे हैं, जहाँ परिवहन और संसाधनों की पहुंच सीमित है। ऐसे में यह पहल दर्शाती है कि जब इच्छाशक्ति और बेहतर योजना साथ हो, तो स्वास्थ्य सेवाएं किसी भी सीमा को पार कर सकती हैं। जिला स्वास्थ्य विभाग की इस पहल को राज्य स्तर पर सराहना मिली है और अब अन्य जिलों में भी इसे लागू करने की दिशा में विचार किया जा रहा है।
स्थानीय जनता ने जताया आभार
शिविरों से लाभांवित होने वाली कई महिलाओं ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि उन्हें पहले सोनोग्राफी जांच के लिए शहर या प्राइवेट क्लिनिक जाना पड़ता था, जिससे समय और पैसे दोनों खर्च होते थे। अब पहली बार उनके गांव में ही यह सुविधा मिली है, जिससे वे न केवल राहत महसूस कर रही हैं बल्कि सुरक्षित मातृत्व की दिशा में एक बड़ा भरोसा भी मिला है।
स्वास्थ्य विभाग कबीरधाम द्वारा यह अभिनव प्रयास यह दर्शाता है कि सरकारी योजनाएं यदि सही ढंग से क्रियान्वित हों, तो उनका लाभ समाज के सबसे कमजोर वर्ग तक पहुंच सकता है। कबीरधाम ने जो मिसाल पेश की है, वह न केवल राज्य में बल्कि देश भर के लिए भी अनुकरणीय उदाहरण है।

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