कवर्धा। आदित्यवाहिनी कवर्धा द्वारा धर्मसम्राट स्वामी श्री करपात्री जी महाराज की जयंती श्रद्धापूर्वक और गरिमामय वातावरण में मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत श्री राधाकृष्ण बड़े मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना से हुई, जिसमें प्रदेश उपाध्यक्ष अवधेश नंदन श्रीवास्तव, पूर्व जिलाध्यक्ष मारुतिशरण शर्मा, अमित शर्मा, शुभांक शर्मा और शाश्वत शर्मा सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने स्वामी करपात्री जी के बहुआयामी व्यक्तित्व और सनातन धर्म के प्रति उनके योगदान पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि स्वामी करपात्री जी शांकर परंपरा के दण्डी स्वामी थे और उन्हें “अभिनव शंकर” तथा “धर्मसम्राट” की उपाधियों से अलंकृत किया गया था। उनका जीवन त्याग, तपस्या, वैदिक विद्वता और राष्ट्रधर्म के लिए समर्पित रहा।
कार्यक्रम में जिला उपाध्यक्ष नंदू ठाकुर, सचिव बृजभूषण वर्मा, सह सचिव अंकुश विश्वकर्मा, भोला तिवारी, राजाराम चंद्रवंशी, सुरेंद्र गुप्ता, अखिलेश देवांगन, दुर्गेश ठाकुर, कमलेश ठाकुर सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
संगोष्ठी में बताया गया कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान स्वामी करपात्री जी ने सनातन धर्म की रक्षा और पुनर्स्थापना के लिए धर्मसभाओं, अधिवेशनों एवं सार्वजनिक आंदोलनों के माध्यम से संघर्ष किया। उनके ग्रंथ “रामायण मिमांसा”, “मार्क्सवाद और रामराज्य”, “विचारपीयूष” इत्यादि आज भी वैदिक विचारधारा का उज्ज्वल प्रतिपादन करते हैं।
वक्ताओं ने बताया कि 1966 में गौवध पर रोक लगाने हेतु दिल्ली में आयोजित विराट गौ रक्षा आंदोलन में उन्होंने नेतृत्व किया था, जिसमें उन पर लाठीचार्ज हुआ और उन्हें जेल भी जाना पड़ा।
कार्यक्रम का समापन सत्संग और प्रसाद वितरण के साथ हुआ। यह आयोजन सनातन संस्कृति और विचार परंपरा के संरक्षण व प्रसार के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बना।