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डोंगरिया महादेव में पूजा-अर्चना कर बोड़ला के लिए रवाना हुई कांवड़ यात्रा — उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और विधायक सुशांत शुक्ला ने किया भव्य स्वागत”

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कवर्धा
नर्मदा मंदिर, अमरकंटक से भोरमदेव मंदिर तक की 151 किमी की पावन कांवड़ यात्रा अपने अंतिम चरण में है। यात्रा के छठवें दिन शनिवार को पंडरिया विधायक भावना बोहरा एवं बड़ी संख्या में शिवभक्तों ने डोंगरिया महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना कर छत्तीसगढ़ की सुख-समृद्धि की कामना के साथ बोड़ला के लिए प्रस्थान किया।
इस दौरान प्रदेश के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने बोड़ला में कांवड़ यात्रियों का गर्मजोशी से स्वागत किया और मंगलमय यात्रा की शुभकामनाएं दीं। विधायक सुशांत शुक्ला ने पंडरिया विधायक भावना बोहरा के साथ पांडातराई से बोड़ला तक पदयात्रा भी की, जिससे भक्तिमय वातावरण में सामाजिक एकता और उत्साह की झलक देखने को मिली।

यात्रा डोंगरिया से होते हुए महामाया मंदिर पांडातराई, खरहट्टा चौक, कुसुमघटा और नेउरगाँव से गुजरकर बोड़ला पहुंची, जहां हजारों की संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों, युवा एवं महिला मोर्चा के सदस्यों और आमजन ने पुष्पवर्षा कर कांवड़ियों का स्वागत किया।
विधायक भावना बोहरा ने इस अवसर पर उपस्थित सभी जनों का आभार प्रकट करते हुए कहा कि
“कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि यह आत्म-संयम, भक्ति, धैर्य और संकल्प का प्रतीक है। यह यात्रा हमारे सनातन संस्कृति की महान परंपरा है जो समाज को भक्ति और एकता की डोर से बांधती है।”

उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान शिवभक्तों ने घने जंगलों, तेज बारिश, नदियों और पहाड़ियों की कठिन राहों को पार किया, लेकिन भोलेनाथ और माँ नर्मदा के आशीर्वाद से हर बाधा को पार करते हुए यात्रा लगातार आगे बढ़ती रही।
यात्रा का समापन रविवार, 27 जुलाई को सुबह 7 बजे बोड़ला से भोरमदेव मंदिर के लिए अंतिम पड़ाव के रूप में प्रारंभ होगा और दोपहर 12 बजे विधिवत पूजा-अर्चना व जलाभिषेक के साथ यात्रा का समापन किया जाएगा। इस अवसर पर पूरे जिले के शिवभक्तों को आमंत्रित करते हुए विधायक बोहरा ने आग्रह किया कि वे इस पुण्य यात्रा में सम्मिलित होकर भक्ति, समर्पण और सनातन संस्कृति की विरासत को साझा करें।

भावना बोहरा ने कहा कि
“यह यात्रा सिर्फ पगों की नहीं, आत्मा की है। यह मानसिक, आध्यात्मिक और सामाजिक एकता का संगम है।”
उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से अपील की कि इस आध्यात्मिक उत्सव में भाग लेकर छत्तीसगढ़ की परंपरागत आस्था को नई ऊंचाई दें और भोलेनाथ की कृपा से समृद्धि और सुख-शांति का मार्ग प्रशस्त करें।

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