सतनाम धर्म और सतनामी समाज की एकता, शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक सशक्तिकरण जैसे अहम मुद्दों को लेकर गिरौदपुरी धाम स्थित सतनाम धर्मशाला, मंड़वा में राष्ट्रीय सतनामी समाज संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया।
इस संगोष्ठी में उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, असम, ओडिशा सहित सात राज्यों से समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से भी भारी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। संगोष्ठी में सतनाम पंथ की राष्ट्रीय पहचान, सामाजिक एकजुटता, शिक्षा के विस्तार और संगठनात्मक मजबूती पर सार्थक विचार-विमर्श हुआ।
समाज के वरिष्ठजनों और वक्ताओं ने गिरौदपुरी धाम को रेल लाइन से जोड़ने की आवश्यकता पर बल देते हुए केंद्र और राज्य सरकार से इस संबंध में शीघ्र निर्णय की अपील की।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष गुरू खुशवंत साहेब ने गिरौदपुरी धाम पहुंचकर पूजा-अर्चना कर गुरू वंदना में भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज के शपथग्रहण और प्रतिभावान छात्र-छात्राओं का सम्मान भी किया गया।
रात्रि भोज उपरांत आयोजित संगोष्ठी में रायपुर, भिलाई, रायगढ़, कांकेर, दुर्ग सहित देशभर से आए समाजसेवियों ने समाज के उत्थान के लिए ठोस सुझाव रखे। प्रमुख उपस्थितजनों में एस.आर. बांधे, मोहन बंजारे, श्याम टांडे, डॉ. दिनेश जांगड़े, अंजलि बरमाल, प्रदीप श्रृंगी, डॉ. स्वामी राम बंजारे, सी.पी. भरतद्वाज, मन्नूलाल चतुर्वेदी, राकेश नारायण बंजारे, खेतलाल ढीढ़ी, केशव जोल्हे सहित अनेक समाजसेवी शामिल थे।
संगोष्ठी ने राष्ट्रीय स्तर पर सतनामी समाज को नई ऊर्जा, दिशा और नेतृत्व देने की संभावना को मजबूत किया है।