BP NEWS CG
कवर्धाछत्तीसगढ़समाचारसिटी न्यूज़

वनवासियों से छल : एकमुश्त चावल योजना में बोड़ला के सराईपटेरा में खुला बड़ा घोटाला

Flex 10x20 new_1
previous arrow
next arrow
छत्तीसगढ़ सरकार ने खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश 2015 के प्रावधानों के तहत गरीब और वनवासी परिवारों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से आदेश जारी किया था कि जून, जुलाई और अगस्त — तीन माह का चावल एकमुश्त वितरण किया जाएगा।
उद्देश्य था कि वनांचल और दुर्गम इलाकों में रहने वाले परिवारों को बार-बार राशन दुकान के चक्कर न लगाने पड़ें और किसी तरह की खाद्य असुरक्षा न बने।
लेकिन कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड के अंतिम छोर पर बसे ग्राम पंचायत सराईपटेरा में इस योजना की सच्चाई सामने आते ही भ्रष्टाचार और लापरवाही का खेल उजागर हो गया है।
POS मशीन में 3 माह का चावल, हक में मिला सिर्फ 2 माह
ग्रामीणों ने बताया कि राशन विक्रेता ने पोस मशीन में जून, जुलाई और अगस्त — तीन माह का वितरण दर्ज कराकर कार्डधारियों से अंगूठा (थम) लगवा लिया।
जबकि वास्तविकता में सिर्फ दो माह का ही चावल दिया गया।
अब अगस्त माह का चावल अलग से आबंटित कर बांटा जा रहा है, जिससे यह साफ हो गया कि एकमुश्त योजना सिर्फ कागजों और मशीन में लागू की गई थी।
 विक्रेता की सफाई – निरीक्षक को बताया
जब ग्रामीणों ने विरोध जताया तो विक्रेता ने सफाई दी कि उसने पूरे मामले की जानकारी खाद्य निरीक्षक खेम चंद्राकर को दे दी थी।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि यदि निरीक्षक को जानकारी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
 नियमों का खुला उल्लंघन
खाद्य सुरक्षा अधिनियम और PDS के नियम स्पष्ट कहते हैं कि –
1. लाभार्थियों को पूरा आवंटित खाद्यान्न देना अनिवार्य है।
2. POS मशीन में गलत प्रविष्टि कराना धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है।
3. इस तरह की गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित विक्रेता का लाइसेंस तत्काल निलंबित/निरस्त किया जा सकता है।
4. संबंधित अधिकारी पर भी समान रूप से जवाबदेही और विभागीय कार्रवाई का प्रावधान है।
 वनवासियों से दोहरी ठगी
सराईपटेरा जैसे वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले लोग पूरी तरह सरकार की राशन योजना पर निर्भर हैं।
ऐसे में योजना का पूरा लाभ न मिलना सीधा गरीबों के हक पर डाका डालने जैसा है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि –
उन्हें तीन माह का चावल कभी एकमुश्त नहीं मिला,
हर बार कटौती कर दो-दो माह का राशन थमा दिया गया,
और रिकॉर्ड में सबकुछ “पूरा वितरण” दिखा दिया गया।
जांच हो, दोषियों पर कार्रवाई
स्थानीय ग्रामीणों ने पायनियर संवाददाता से कहा कि —
“हम लोग सरकार के भरोसे हैं, लेकिन दुकान में पूरा राशन नहीं मिलता। पोस मशीन में अंगूठा लगवाकर कागजों में तीन माह का चावल दिखा दिया गया। हमको तो दो माह का ही मिला। ऐसे में जांच होनी चाहिए और दोषी विक्रेता व अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो।”
 सिस्टम पर जिम्मेदारी किसकी
1. क्या जिला खाद्य अधिकारी और निरीक्षक ने एकमुश्त वितरण का निरीक्षण किया था?
2. POS मशीन की प्रविष्टि और वास्तविक वितरण में अंतर क्यों नहीं पकड़ा गया?
3. गरीब और वनवासी परिवारों को उनके हक से वंचित करने का जिम्मेदार कौन है – विक्रेता या खाद्य विभाग के अफसर?
 यह पूरा मामला वनवासियों से जुड़ा है, जहां सरकारी योजनाएं ही जीवन रेखा होती हैं। ऐसे में यदि महत्वाकांक्षी योजनाएं कागजों में पूरी और जमीनी स्तर पर अधूरी रह जाएं, तो यह सीधे-सीधे शासन की नीयत और व्यवस्था पर सवाल उठाता है।

IMG-20250710-WA0006
previous arrow
next arrow

Related posts

श्रमजीवी पत्रकार कल्याण संघ की प्रदेश कार्यकारिणी भंग, तदर्थ समिति गठित

Bhuvan Patel

खेत विवाद में फरसे से जानलेवा हमला: अधियारा ने किसान की गर्दन पर किया वार, आरोपी गिरफ्तार

Bhuvan Patel

समाज की नसीहत बनी सज़ा: रायपुर में डॉक्टर पर हमला, प्रेमी युगल ने टोके जाने पर बरसाए पत्थर और लात-घूंसे

Bhuvan Patel

Leave a Comment

error: Content is protected !!