जिला प्रशासन की ओर से स्वीकृत करोड़ों की लागत वाले निर्माण कार्यों में गंभीर लापरवाही और गुणवत्ता में भारी कमी उजागर हुई है। सहसपुर लोहारा के ग्राम मोतिमपुर में कृषि उपज मंडी बोर्ड से स्वीकृत भवन निर्माण कार्यों का निरीक्षण करने पहुंचे कलेक्टर गोपाल वर्मा ने खुद मौके पर जांच की, जिसमें दीवार का प्लास्टर मामूली रॉड से ही उखड़ गया।
निरीक्षण के दौरान सामने आई इस बड़ी चूक पर कलेक्टर ने तकनीकी अमले को कड़ी फटकार लगाई और स्पष्ट चेतावनी दी कि अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
28 कार्य पूरे, 35 अधूरे, 8 अब तक शुरू ही नहीं
कलेक्टर को दी गई जानकारी के अनुसार, मंडी बोर्ड द्वारा 4.58 करोड़ रुपये की लागत से 63 निर्माण कार्य स्वीकृत हुए हैं, जिनमें 28 पूर्ण और 35 कार्य अब भी अधूरे हैं। चिंता की बात यह है कि 8 कार्य अब तक प्रारंभ भी नहीं हुए हैं, जबकि 2 कार्यों का कार्यादेश तक जारी नहीं हुआ है।
निर्माण कार्यों की प्रगति रिपोर्ट में कई कार्य सिर्फ फाउंडेशन या लेआउट स्तर पर हैं, जबकि कुछ पर स्लैब या लिंटल स्तर तक ही काम हुआ है।
निगरानी तंत्र फेल, फील्ड स्तर पर जवाबदेही कमजोर
निरीक्षण के दौरान स्पष्ट हुआ कि स्थानीय अधिकारियों की मॉनिटरिंग बेहद कमजोर रही है। कलेक्टर ने एसडीएम और जनपद सीईओ को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे नियमित निरीक्षण करें और कार्यों को तय समय में गुणवत्तापूर्वक पूर्ण कराएं।
किसानों ने भी बताई परेशानियां
मोतिमपुर दौरे के दौरान कलेक्टर ने वनांचल क्षेत्र के किसानों से बातचीत की, जहां खेती-किसानी से जुड़ी समस्याएं भी सामने आईं। किसानों ने मौसमी असंतुलन और समय पर सहायता न मिलने की बात कही, जिस पर प्रशासन ने आश्वासन तो दिया, लेकिन अब तक का ढीला अमल किसानों की चिंता बढ़ा रहा है।