कवर्धा। नगर पालिका परिषद पंडरिया के हृदय स्थल गांधी चौक पर भारत माता प्रतिमा स्थल निर्माण कार्य तेजी से जारी है। यह चौक नगर का सबसे व्यस्त और चर्चित इलाका है, जहां से रोज़ हजारों लोगों का आवागमन होता है। नगर वासियों के साथ-साथ अध्यक्ष, पार्षद, अधिकारी-कर्मचारी और अन्य जनप्रतिनिधि भी इसी रास्ते से गुजरते हैं। ऐसे में यहां का कोई भी कार्य जनता और व्यवस्था दोनों की कसौटी पर कसता है।
लेकिन, इस निर्माण कार्य की शुरुआत से ही गंभीर अनियमितताओं की चर्चाएं तेज़ हैं। जानकारी के मुताबिक, प्राक्कलन (Estimate) में स्वीकृत मानक सामग्री के बजाय स्थानीय नदी की मिट्टी युक्त रेत का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह तथ्य सवाल खड़े करता है कि जब नगर का प्रमुख स्थल है तो घटिया सामग्री का प्रयोग क्यों और किसकी मिलीभगत से हो रहा है।
और तो और, यह ठेका उसी ठेकेदार को दिया गया है जिसने नगर पंचायत पांडातराई में भारत माता प्रतिमा स्थल का निर्माण किया था। वहां भी अनुचित सामग्री उपयोग और गुणवत्ता पर सवाल उठे थे, जिससे वह काम लंबे समय तक चर्चा में रहा। इसके बावजूद पंडरिया में उसी ठेकेदार को काम सौंपना अधिकारियों और जिम्मेदारों की नीयत पर प्रश्नचिन्ह लगाता है। नागरिकों का कहना है कि जब पुराना अनुभव खराब था, तो नए काम के लिए वही ठेकेदार चुनना साफ इशारा करता है कि गड़बड़ी ऊपर से संरक्षित है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि निर्माणाधीन स्थल पर पहले यात्री प्रतीक्षालय और सार्वजनिक शौचालय मौजूद थे, जिन्हें तोड़कर यह काम शुरू किया गया है। अब नगर के इस भीड़भाड़ वाले चौक पर यात्रियों के लिए शौचालय नहीं है। इसका सीधा असर महिला यात्रियों पर पड़ रहा है, जिन्हें सबसे ज्यादा असुविधा का सामना करना पड़ता है। नागरिक सवाल उठा रहे हैं कि जब ‘भारत माता’ के नाम पर नया स्मारक खड़ा किया जा रहा है, तो क्या जनता की बुनियादी सुविधा छीन लेना उचित है?

स्थानीय जानकारों का कहना है कि यह निर्माण कार्य शुरुआत से ही पारदर्शिता से दूर है। न तो जनता को जानकारी दी गई, न ही ठेकेदार की जवाबदेही तय की गई। नगर के हृदय स्थल पर हो रहे इस निर्माण से साफ संदेश जा रहा है कि जिम्मेदार लोग गुणवत्ता और सुविधा से ज्यादा दिखावे की राजनीति में व्यस्त हैं।
उच्च स्तर की जांच की मांग
क्या गांधी चौक पर भारत माता प्रतिमा स्थल ‘गर्व का प्रतीक’ बनेगा या ‘भ्रष्टाचार और उपेक्षा’ का नया उदाहरण । क्या महिला यात्रियों की असुविधा और आमजन की सुविधा की अनदेखी किसी भी तरह उचित ठहराई जा सकती है और आखिरकार, अधिकारी व जनप्रतिनिधि सब कुछ देखकर भी मौन क्यों हैं ।
नगर की जनता अब इस काम की उच्च स्तरीय जांच की मांग करने लगी है।




