जिले में पहली बार पुलिस द्वारा आयोजित ओपन शतरंज प्रतियोगिता ने इतिहास रच दिया। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के 25वें वर्ष प्रवेश पर्व और छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव के अवसर पर पुलिस ने यातायात जागरूकता, साइबर जागरूकता और नशा मुक्ति अभियान को एक नई दिशा देते हुए शतरंज प्रतियोगिता का आयोजन किया।
सुबह 8 बजे से इंडोर स्टेडियम बलौदाबाजार में शुरू हुई इस प्रतियोगिता का शुभारंभ जिला पंचायत अध्यक्ष आकांक्षा जायसवाल, नगर पालिका परिषद अध्यक्ष अशोक जैन, जनपद पंचायत अध्यक्ष सुलोचना यादव, कलेक्टर दीपक सोनी, पुलिस अधीक्षक भावना गुप्ता और वन मंडलाधिकारी गणेश धम्मशील के मुख्य आतिथ्य में किया गया।
पुलिस अधीक्षक भावना गुप्ता ने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कहा— “शतरंज एकाग्रता और धैर्य का खेल है। इसमें खिलाड़ी या तो जीतता है या फिर सीखता है।” उन्होंने युवाओं को मन लगाकर खेलने और जीवन में सकारात्मक राह चुनने का संदेश भी दिया।
इस प्रतियोगिता में कुल 200 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिन्हें 15 वर्ष से कम और 15 वर्ष से अधिक दो वर्गों में बांटा गया। खिलाड़ियों के बीच कुल 07 राउंड खेले गए और विजेताओं का चयन किया गया। निष्पक्ष खेल सुनिश्चित करने के लिए दुर्ग जिले से ऑर्बिटर रेफरी बुलाए गए थे।
कार्यक्रम का आकर्षण तब बढ़ गया जब बालिका वर्ग में विजेता प्रतिभागी को पुरस्कार स्वरूप प्रतीकात्मक चेक और ट्रॉफी प्रदान की गई। हालांकि पुरस्कार स्वरूप दिए गए चेक में राशि को लेकर गड़बड़ी सामने आई — शब्दों में “सात हजार पाँच सौ” जबकि अंकों में “सात हजार” अंकित था। इस चूक ने पूरे आयोजन की गंभीरता पर सवाल खड़ा कर दिया।
इसके बावजूद यह आयोजन जिले के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। पुलिस की इस पहल ने साबित किया कि खेल सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने और गलत राह से बचाने का सशक्त माध्यम भी है।