कवर्धा वन मंडल के भोरमदेव अभ्यारण्य क्षेत्र में स्थित बांध गांव के पास का बैरियर अब वन्यजीव सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। नियमों के अनुसार इस मार्ग से केवल सूर्योदय से सूर्यास्त तक ही आवागमन की अनुमति है, ताकि रात्रिकालीन समय में जंगली जानवरों की प्राकृतिक गतिविधियों में बाधा न पहुंचे लेकिन वास्तविकता यह है कि इस संवेदनशील बैरियर पर कोई वन विभाग का स्थायी स्टाफ तैनात नहीं है।
पूरा क्षेत्र केवल चौकीदारों के भरोसे संचालित हो रहा है, जिनके पास सीमित संसाधन और सुरक्षा उपकरण हैं।
सूत्रों के अनुसार, वन कर्मी सहित उच्च अधिकारी मुख्यालय कवर्धा से ही निरीक्षण और दौरे करते हैं, जिससे मैदान स्तर पर निगरानी और गश्त की निरंतरता बाधित होती है।
इस स्थिति से वन्यजीवों की सुरक्षा, अवैध प्रवेश, और संभावित शिकार की घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।
जानकारों का कहना है कि अभ्यारण्य जैसे अति-संवेदनशील क्षेत्रों में बैरियर पर स्थायी तैनाती और नियमित निगरानी अनिवार्य है, अन्यथा संरक्षण के सभी प्रयास व्यर्थ हो जाएंगे।
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि कई बार रात के समय वाहन और व्यक्ति बिना अनुमति के बैरियर पार करते हैं, पर कोई रोकथाम नहीं होती।
पर्यावरण प्रेमियों ने इस स्थिति को अत्यंत गंभीर बताते हुए विभाग से तत्काल कर्मचारियों की स्थायी तैनाती और सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने की मांग की है।
भोरमदेव अभ्यारण्य छत्तीसगढ़ की जैवविविधता की पहचान है — लेकिन यदि निगरानी व्यवस्था यूं ही ढीली रही, तो यह विरासत संकट में पड़ सकती है।