बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को जड़ से मिटाने का ठोस संकल्प लिया है। बाल विकास विभाग ने जिले को बाल विवाह मुक्त जिला बनाने की दिशा में सतत अभियान चलाया है।
शासन के निर्देशानुसार ग्राम पंचायत सचिवों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी अधिसूचित किया गया है, जिससे पंचायत स्तर पर जवाबदेही तय हो सके। विभाग की पहल से सरपंचों, सचिवों और अन्य हितधारकों को संवेदनशील बनाते हुए सामाजिक भागीदारी को बढ़ाया गया है।
अक्टूबर और देवउठनी एकादशी के अवसर पर पंचायत सचिवों एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने मिलकर कई बाल विवाह रोके। चाइल्डलाइन से प्राप्त 5 प्रकरणों — सण्डी (पलारी), सेल (कसडोल), डोटोपार (बलौदाबाजार), लांजा और नयागांव (सिमगा) — में सचिवों ने तत्काल कार्रवाई कर विवाह रुकवाए। पुलिस सहयोग से जिले में अब तक 256 बाल विवाह रोकथाम की कार्यवाही की जा चुकी है।
बाल अधिकारों और बाल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने विभाग लगातार विद्यालयों और महाविद्यालयों में विशेष कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। इसी क्रम में जिले की 225 ग्राम पंचायतों ने 2 अक्टूबर को आयोजित ग्राम सभा में “बाल विवाह नहीं होने की” स्व-घोषणा की और प्रस्ताव पारित किया।
राज्योत्सव के जिला स्तरीय कार्यक्रम में इन 225 पंचायतों को “बाल विवाह मुक्त पंचायत” प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
जिला कार्यक्रम अधिकारी अतुल परिहार ने बताया कि जल्द ही जिला स्तरीय बाल विवाह जागरूकता सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें विवाह आयोजन से जुड़े सभी वर्ग — ज्वैलर्स, प्रिंटर्स, टेंट एवं साउंड संचालक, कैटरर्स, पुजारी, मौलवी और फादर — शामिल होंगे। उन्हें बाल विवाह के दुष्परिणामों की जानकारी दी जाएगी ताकि समाज में एकजुट होकर इस कुरीति को समाप्त किया जा सके।
जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि जिले की सभी 520 ग्राम पंचायतें और 8 नगर पंचायतें निकट भविष्य में बाल विवाह मुक्त घोषित हों और बलौदाबाजार छत्तीसगढ़ का पहला पूर्ण बाल विवाह मुक्त जिला बने।