छत्तीसगढ़ शासन के पर्यटन विभाग द्वारा वर्ष 2022 में भूमिपूजन किए गए कबीर सागर (सरवर) निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति अब गंभीर सवालों के घेरे में है। यह महत्वपूर्ण परियोजना कबीर धर्म नगर, दामाखेड़ा (जिला बलौदाबाजार–भाटापारा) में संचालित की जा रही है, जो देशभर के कबीर पंथियों की आस्था का प्रमुख केंद्र मानी जाती है।
शिलालेख के अनुसार 17 मार्च 2022 को भूमिपूजन के साथ कार्य प्रारंभ हुआ था, लेकिन लगभग तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी आज की स्थिति में महज करीब 40 प्रतिशत कार्य ही पूर्ण हो पाया है। सूत्रों के अनुसार निर्माण में गलत डिजाइनिंग और तकनीकी खामियों के चलते 3 करोड़ रुपये से अधिक का निर्माण कार्य खराब हो गया। बरसात के दौरान सरोवर की सुरक्षा दीवार (वाल) गिरने की घटना ने निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए।
इस घटना के बाद जिला स्तरीय जांच कराई गई, लेकिन अब तक उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। विभाग निर्माण एजेंसी को दोषी ठहरा रहा है, जबकि ठेकेदार विभागीय लापरवाही को जिम्मेदार बता रहा है। जवाबदेही तय न होने से पूरा मामला संदेह के घेरे में बना हुआ है।
विश्वसनीय सूत्रों से यह भी जानकारी सामने आई है कि महालेखागार द्वारा लगभग 3 करोड़ 11 लाख रुपये की ऑडिट आपत्ति दर्ज की गई है, जो वित्तीय अनियमितताओं की ओर इशारा करती है।
कुल मिलाकर, बलौदाबाजार जिले के दामाखेड़ा स्थित कबीर धर्म नगर में कबीर पंथियों की आस्था से जुड़ा यह सरोवर आज भी अधूरा पड़ा है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद न तो कार्य पूरा हो सका और न ही जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हुई। अब यह सवाल और भी गंभीर हो गया है कि क्या इस पवित्र परियोजना में हुई लापरवाही और वित्तीय अनियमितताओं पर जिम्मेदारों पर कभी कार्रवाई होगी या ‘कबीर सागर’ केवल फाइलों में ही पूर्ण माना जाएगा।