कवर्धा जिले में राजस्व प्रकरणों के अंबार और धान खरीदी में वर्षों से चली आ रही अव्यवस्थाओं के बीच एक बार फिर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा ने तहसीलवार लंबित प्रकरणों के समय-सीमा में निराकरण और धान खरीदी में कोचियों–बिचौलियों पर कड़ी निगरानी के निर्देश दिए, लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल निर्देशों की पुनरावृत्ति से व्यवस्था सुधर पाएगी ।
जिले की तहसीलों में अविवादित नामांतरण, खाता विभाजन, सीमांकन, त्रुटि सुधार, डायवर्सन और नक्शा बटांकन जैसे मामलों में आम नागरिक महीनों से भटक रहे हैं। समीक्षा में समय-सीमा से बाहर लंबित प्रकरणों पर चिंता जताई गई, पर अब तक लापरवाह अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई न होना प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर सवाल खड़े करता है।
धान खरीदी को किसान-हितैषी और पारदर्शी बनाने की बात हर बैठक में दोहराई जाती है, लेकिन कोचियों और बिचौलियों की सक्रियता पर जमीनी सख्ती अब तक नजर नहीं आई। सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध धान परिवहन की आशंका हर साल सामने आती है, फिर भी कार्रवाई के दावे केवल फाइलों तक सीमित दिखते हैं।
कलेक्टर ने सीमांकन कार्यों में तेजी और अपार आईडी जैसे मामलों में सतर्कता के निर्देश दिए, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति इससे इतर है। अधिकारियों की मौजूदगी और निर्देशों के बावजूद राजस्व न्याय समय पर जनता तक नहीं पहुंच पा रहा, यही इस समीक्षा की सबसे बड़ी सच्चाई है।
जब तक निर्देशों के साथ जवाबदेही तय कर लापरवाह अफसरों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसी बैठकें जनता के लिए राहत नहीं, बल्कि औपचारिकताओं का सिलसिला ही बनी रहेंगी।