बलौदा बाजार जिले की ग्राम पंचायत झोका (जनपद पंचायत बलौदा बाजार) में विकास कार्यों की जमीनी हकीकत चौंकाने वाली है। यहां निर्मित लगभग 100 सीसी सड़कें महज तीन–चार महीनों में ही दरारों से भर गईं। यह न सिर्फ घटिया निर्माण सामग्री और तकनीकी लापरवाही की ओर इशारा करता है, बल्कि शासन के स्पष्ट निर्देशों की खुली अवहेलना भी उजागर करता है।
सबसे गंभीर पहलू यह है कि इन सड़कों के निर्माण स्थलों पर नागरिक सूचना पटल (सूचना बोर्ड) तक नहीं लगाया गया, जबकि विकास आयुक्त कार्यालय, छत्तीसगढ़ द्वारा 14 जुलाई 2025 को जारी आदेश (क्रमांक 2371/8767/तक./वि-3/ग्रायांसे/2025) में यह स्पष्ट रूप से निर्देशित है कि
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पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत होने वाले समस्त निर्माण कार्यों में कार्य प्रारंभ होने से पूर्व अनिवार्य रूप से सूचना पटल लगाया जाए, जिसमें ग्राम/ग्राम पंचायत का नाम, कार्य का नाम, योजना/मद, स्वीकृति दिनांक, स्वीकृत राशि, पूर्णता दिनांक एवं निर्माण एजेंसी का स्पष्ट उल्लेख हो।
आदेश के बावजूद झोका की इन सड़कों पर न सूचना पटल, न पारदर्शिता—और ऊपर से इतनी कम अवधि में दरारें। यह सवाल उठना लाज़मी है कि जब कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के अभियंता सूचना पटल सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार हैं, तो आखिर निगरानी किस स्तर पर फेल हुई।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सूचना पटल होता, तो योजना, लागत और जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी सार्वजनिक रहती, जिससे जवाबदेही तय होती। आज हालात यह हैं कि सड़कें टूट रही हैं और जिम्मेदारी हवा में।
इतना जल्दी सीसी रोड में दरारें आना मानक मिश्रण, मोटाई, curing और तकनीकी परीक्षण में गंभीर लापरवाही का प्रमाण है। ऐसे में यह मामला केवल घटिया निर्माण का नहीं, बल्कि तकनीकी अधिकारियों, कार्यदायी एजेंसी और प्रशासनिक निगरानी—तीनों की भूमिका पर बड़ा प्रश्नचिह्न है।
अब मांग उठ रही है कि पूरे प्रकरण की
स्वतंत्र तकनीकी जांच,
विकास आयुक्त के आदेशों के उल्लंघन पर जवाबदेही तय,
दोषियों पर कड़ी कार्रवाई,
और सभी क्षतिग्रस्त सड़कों का री-वर्क कराया जाए।
यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो झोका की ये दरारें केवल सड़क तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि ग्रामीण विकास योजनाओं की साख पर राष्ट्रीय स्तर पर गहरी दरार बन जाएंगी।