छत्तीसगढ़ के घने जंगल अब केवल प्रदेश की पहचान नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। बलौदाबाज़ार जिले में स्थित बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य की नैसर्गिक सुंदरता ने इस बार यूरोपीय देश लातविया से आई अंतर्राष्ट्रीय पर्यटक सुश्री बाइबा कालनीना को गहराई से आकर्षित किया।
मीलों दूर यूरोप से शांति और प्रकृति के सान्निध्य की तलाश में पहुँची सुश्री बाइबा ने बारनवापारा के जंगलों में सुकून भरे पल बिताए। सफारी भ्रमण के दौरान उन्होंने भालू, गौर, कृष्णमृग, सांभर और चीतल (स्पॉटेड डियर) जैसे वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में बेधड़क विचरण करते देखा। उन्होंने अभयारण्य की जैव विविधता, स्वच्छ वातावरण, फ्लोरा-फौना तथा वन विभाग द्वारा किए जा रहे संरक्षण और प्रबंधन कार्यों की खुले दिल से सराहना की।
उल्लेखनीय है कि वन विभाग द्वारा बारनवापारा अभयारण्य में सुरक्षित, जिम्मेदार और सतत इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। स्थानीय समुदायों की सहभागिता सुनिश्चित करते हुए पर्यटन, संरक्षण और आजीविका के बीच संतुलन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे यह अभयारण्य एक सफल इको-टूरिज्म मॉडल के रूप में उभर रहा है।
राज्य शासन और वन विभाग की योजनाबद्ध पहल का ही परिणाम है कि प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 1 नवंबर 2025 से पुनः पर्यटकों के लिए खोला गया बारनवापारा अभयारण्य आज देश-विदेश के पर्यटकों की पहली पसंद बनता जा रहा है। यहाँ तेंदुआ, भालू, गौर, कृष्णमृग, सांभर, जंगली सूअर सहित अनेक प्रमुख वन्यजीवों के साथ-साथ 200 से अधिक प्रजातियों के पक्षी प्रकृति प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण हैं।
पर्यटकों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इस वर्ष सफारी व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ किया गया है। अभयारण्य में रवान, पकरीद एवं बरबसपुर — तीन मुख्य प्रवेश द्वारों से सफारी सुविधा उपलब्ध है। इसके साथ ही विशेष रूप से विकसित लेपर्ड सफारी जोन तेंदुआ दर्शन की उच्च संभावनाओं के कारण पर्यटकों के बीच आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
हरियाली, शांति और रोमांच के इस अद्भुत संगम के साथ बारनवापारा अभयारण्य आज छत्तीसगढ़ की पहचान को वैश्विक स्तर पर नई ऊँचाई दे रहा है।