कवर्धा। जिले में पर्यावरण और वन कानूनों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जिला मुख्यालय कवर्धा सहित पंडरिया, बोड़ला और सहसपुर लोहारा विकासखंड मुख्यालयों के आसपास ही नहीं, बल्कि बीहड़ जंगलों और कोर एरिया तक अवैध ईंट भट्टों का संचालन धड़ल्ले से किया जा रहा है। हालात यह हैं कि प्रतिबंधित क्षेत्रों में भी बिना किसी भय के ईंट निर्माण और बिक्री जारी है।
जानकारी के अनुसार इन अवैध ईंट भट्टों में बिना रॉयल्टी के कोयले का उपयोग किया जा रहा है, जबकि भट्टों को जलाने के लिए हरे-भरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की जा रही है। वन संपदा को नष्ट कर निजी मुनाफा कमाने का यह खेल लंबे समय से चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की भूमिका संदेह के घेरे में है।
वनांचल क्षेत्रों में स्थिति और भी भयावह है। राजस्व भूमि से महुआ सहित अन्य उपयोगी वृक्षों की अवैध कटाई लगातार जारी है। वहीं कोर एरिया और बीहड़ जंगलों से कीमती इमरती लकड़ी की तस्करी बेखौफ तरीके से की जा रही है। यह सब न केवल वन संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन है, बल्कि पूरे क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।



