राज्य सरकार के स्पष्ट निर्देशों की खुलेआम अनदेखी का मामला कबीरधाम जिले के पंडरिया विकासखंड से सामने आया है। सरकार द्वारा प्रत्येक माह की 7 तारीख को “चावल उत्सव” आयोजित करने के आदेश के बावजूद जनवरी 2026 में पंडरिया विकासखंड की एक भी उचित मूल्य दुकान में चावल उत्सव का आयोजन नहीं हो सका।
स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब यह तथ्य सामने आता है कि जनवरी माह का चावल अब तक लगभग 60 प्रतिशत उचित मूल्य दुकानों में भंडारित ही नहीं हुआ, जबकि नियमानुसार फरवरी माह के चावल का भंडारण जनवरी माह में ही शुरू होकर पूरा हो जाना चाहिए था।
ट्रांसपोर्ट भुगतान नहीं, इसलिए नहीं पहुँचा राशन
सूत्रों के अनुसार, परिवहन एजेंसियों को भुगतान नहीं होने के कारण राशन सामग्री का परिवहन प्रभावित हुआ। इसी वजह से पंडरिया विकासखंड की अधिकांश PDS (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) दुकानों तक चावल और अन्य खाद्यान्न नहीं पहुँच पाए।
PDS सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं—
क्या राज्य सरकार के आदेश केवल कागजी औपचारिकता बनकर रह गए हैं?
क्या जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही से गरीबों का हक रोका जा रहा है?
क्या राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून की भावना का उल्लंघन हो रहा है?
गरीब हितग्राहियों के अधिकारों से खिलवाड़
चावल उत्सव का उद्देश्य समय पर वितरण, पारदर्शिता और हितग्राहियों को राहत देना था, लेकिन पंडरिया विकासखंड में हालात इसके ठीक उलट नजर आ रहे हैं। राशन नहीं मिलने से गरीब और पात्र परिवारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासन की भूमिका सवालों के घेरे में
अब सवाल यह है कि—
इस गंभीर लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है?
क्या दोषी अधिकारियों और एजेंसियों पर कार्रवाई होगी?
या फिर यह मामला भी अन्य अनियमितताओं की तरह फाइलों में दब जाएगा?
फिलहाल पंडरिया विकासखंड में चावल उत्सव नहीं, बल्कि PDS व्यवस्था की विफलता सुर्खियों में है।