प्रशासनिक गरिमा और सिविल सेवा आचरण की खुलेआम धज्जियां उड़ाने का गंभीर मामला सामने आया है। गरियाबंद जिले के मैनपुर एसडीएम पद पर पदस्थ रहे डिप्टी कलेक्टर तुलसीदास मरकाम को अश्लील ‘ओपेरा’ कार्यक्रम की अनुमति देना और स्वयं मौके पर मौजूद रहने की पुष्टि के बाद रायपुर संभाग आयुक्त द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
मामला ग्राम उरमाल (थाना देवभोग) का है, जहां 5 से 10 जनवरी 2026 तक आयोजित तथाकथित ओपेरा कार्यक्रम में खुलेआम अश्लील नृत्य और अशोभनीय गतिविधियां संचालित होती रहीं। चौंकाने वाली बात यह रही कि कार्यक्रम को अनुमति देने वाले डिप्टी कलेक्टर तुलसीदास मरकाम स्वयं 9 जनवरी की रात कार्यक्रम में मौजूद रहे, लेकिन अश्लीलता पर रोक लगाने के बजाय मूकदर्शक बने रहे। इसी दौरान बनाए गए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए और अखबारों में भी प्रकाशित हुए, जिसके बाद प्रशासन की किरकिरी हुई।
जांच में सामने आया कि कार्यक्रम की अनुमति नियमों को ताक पर रखकर उसी दिन 29 दिसंबर 2025 को जारी कर दी गई थी, जो “सार्वजनिक कार्यक्रमों की पूर्व अनुमति” संबंधी निर्देशों का सीधा उल्लंघन है। अपर कलेक्टर गरियाबंद की जांच रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख किया गया कि अफसर ने न तो नियमों का पालन किया और न ही मौके पर अश्लीलता रोकने के लिए कोई कार्रवाई की। कलेक्टर गरियाबंद द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस का जवाब भी संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद यह स्पष्ट हो गया कि पूरा मामला कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही, नैतिक पतन और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम-3 का खुला उल्लंघन है। प्रशासन ने अंततः कार्रवाई करते हुए डिप्टी कलेक्टर तुलसीदास मरकाम को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय बलौदाबाजार-भाटापारा निर्धारित किया गया है। यह मामला न केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि यदि वायरल वीडियो सामने न आते, तो शायद यह अश्लीलता और नियमों की अनदेखी फाइलों में ही दबी रह जाती।