भाटापारा तहसील के बकुलाही स्थित रियल इस्पात स्टील प्लांट में गुरुवार सुबह हुआ भीषण हादसा एक बार फिर साबित करता है कि उद्योगों में मजदूरों की जान की कीमत शून्य है। सुबह लगभग 9:40 बजे क्लीन से निकल रहे डस्ट सेटलिंग चैंबर (DSC) में अचानक हुए जोरदार ब्लास्ट ने प्लांट को मौत का अड्डा बना दिया।
हादसे के वक्त चैंबर के नीचे काम कर रहे 6 श्रमिकों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 5 अन्य गंभीर रूप से झुलस गए, जिन्हें तत्काल बिलासपुर के बर्न ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया है। मृतक और घायल सभी श्रमिक अन्य राज्यों से लाए गए ठेका मजदूर बताए जा रहे हैं।
कानून कागज़ों में, मजदूर कब्रों में
यह हादसा सीधे-सीधे फैक्ट्री एक्ट 1948, ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड 2020, इंडस्ट्रियल सेफ्टी नॉर्म्स, तथा श्रमिक सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की ओर इशारा करता है।
प्रश्न यह है कि—
क्या डीएससी यूनिट की नियमित सेफ्टी ऑडिट हुई थी?
क्या विस्फोट संभावित क्षेत्र में मजदूरों को काम पर लगाया जाना नियमसम्मत था?
क्या फायर सेफ्टी, गैस प्रेशर और डस्ट कंट्रोल सिस्टम मानकों के अनुरूप थे?
और सबसे बड़ा सवाल—क्या प्लांट प्रबंधन को पहले से खतरे की जानकारी थी?
घटना के बाद जागा प्रशासन
हादसे के बाद मौके पर कलेक्टर दीपक सोनी और पुलिस अधीक्षक भावना गुप्ता जिला प्रशासन की टीम के साथ पहुंचे। प्रशासन ने आनन-फानन में रियल इस्पात प्लांट को तत्काल सील करने के निर्देश दिए।
एसडीएम की अध्यक्षता में जांच समिति गठित कर विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं प्लांट प्रबंधन से कड़ी पूछताछ जारी है।



