महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत कार्यरत संविदा कर्मचारियों ने वर्षों से ग्रामीण विकास और शासन व्यवस्था को मज़बूती देने में अहम भूमिका निभाई है। कोरोना काल जैसे कठिन समय में भी इन कर्मचारियों ने पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारियाँ निभाईं।
वर्तमान में प्रदेश में 12 हजार से अधिक मनरेगा कर्मचारी कार्यरत हैं, जो योजना के क्रियान्वयन की रीढ़ माने जाते हैं। ऐसे में इनके लिए सेवा-सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी एचआर पॉलिसी का विषय लंबे समय से विचाराधीन है।
अगस्त 2024 में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा नियमितीकरण तक एचआर पॉलिसी लागू करने का आश्वासन दिया गया था। कर्मचारियों को उम्मीद है कि शासन इस दिशा में शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर उनकी वर्षों पुरानी मांगों को पूरा करेगा।
कर्मचारियों का मानना है कि एचआर पॉलिसी लागू होने से न केवल कार्य संतोष बढ़ेगा, बल्कि आकस्मिक परिस्थितियों में उनके परिवारों को भी आवश्यक संरक्षण और सहायता मिल सकेगी। इससे योजना की कार्यकुशलता और पारदर्शिता दोनों में और मजबूती आएगी।
अब मनरेगा कर्मचारी शासन से यह अपेक्षा कर रहे हैं कि उनकी सेवाओं के महत्व को देखते हुए सेवा-सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी नीतियों पर जल्द अमल किया जाएगा, ताकि वे और अधिक आत्मविश्वास के साथ ग्रामीण विकास में योगदान दे सकें।