कवर्धा। संभागीय सरस मेला 2026 के दौरान बीते दिन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने ऐसा समां बांधा कि पूरा परिसर उत्साह और तालियों की गूंज से भर उठा। लोकनृत्य, मधुर गीत-संगीत और पारंपरिक झलकियों ने दर्शकों को न केवल मंत्रमुग्ध किया, बल्कि क्षेत्रीय संस्कृति की समृद्ध विरासत का प्रभावशाली प्रदर्शन भी किया। मंच पर प्रस्तुत हर रंग ने यह साबित कर दिया कि हमारी लोक परंपराएं आज भी उतनी ही जीवंत और सशक्त हैं।
कार्यक्रम में विभिन्न सांस्कृतिक दलों और कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। पारंपरिक वेशभूषा, लोकधुनों की लय और सामूहिक नृत्य की ऊर्जा ने आयोजन को यादगार बना दिया। यह केवल मनोरंजन का मंच नहीं रहा, बल्कि संस्कृति संरक्षण का एक सशक्त माध्यम बनकर सामने आया।
आयोजन का प्रमुख आकर्षण सम्मान समारोह रहा, जहां उत्कृष्ट प्रस्तुति देने वाले कलाकारों को मंच पर आमंत्रित कर सम्मानित किया गया। पत्रकार संजीव मिश्रा और जिला पंचायत के सूचना सहायक अधिकारी विनीत दास ने कलाकारों को सम्मान प्रदान किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन ग्रामीण और क्षेत्रीय प्रतिभाओं को पहचान देने के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
संभागीय सरस मेला अब केवल व्यापारिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक जागरूकता और प्रतिभा प्रोत्साहन का सशक्त मंच बन चुका है। कलाकारों के उत्साह और दर्शकों की सहभागिता ने यह संदेश दिया कि अपनी जड़ों से जुड़ाव ही हमारी असली ताकत है। यह आयोजन क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक सार्थक पहल साबित हो रहा है।