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गोंडवाना गोड़ महासभा कामठी में एक दिवसीय शपथ ग्रहण समारोह संपन्न, पुरखा संस्कृति संरक्षण और सामाजिक एकता का लिया संकल्प

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कबीरधाम जिले के प्रतापगढ़ कामठी स्थित गोंडवाना गोड़ महासभा प्रधान कार्यालय में दिनांक 17 मई 2026, रविवार को महासभा के मनोनीत पदाधिकारियों का एक दिवसीय शपथ ग्रहण एवं सम्मान समारोह पारंपरिक गौरव और सामाजिक एकता के वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का आयोजन बुढ़ा देव ठाना की पवित्र धरती कामठी में किया गया, जहां बुढादेव, गोंडवाना प्रतीक हाथी पर सिंह देव, महामाई और भिमालपेन की पूजा-अर्चना एवं दीप प्रज्ज्वलन कर श्रद्धा के साथ बुढ़ा देव सुमरनी से शुभारंभ किया गया। उपस्थित अतिथियों का स्वागत दुनिया की अनमोल रत्न पिला चांवल से किया गया।

महासभा अध्यक्ष की उपस्थिति एवं सहमति से विभिन्न पदाधिकारियों का मनोनयन किया गया तथा तत्पश्चात सामूहिक शपथ ग्रहण समारोह आयोजित हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में गोण्डी भाषा के प्रसिद्ध साहित्यकार, इतिहासकार एवं गोंडवाना गोड़ महासभा भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष तिरुपति दादा बी.एल. कोर्राम उपस्थित रहे। साथ ही पण्डरिया रियासत के राजा तिरु हेमंत राज, वीरेन्द्र राज एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता तिरु द्विज्जेन्द सिंह मार्को महासभा अध्यक्ष गोंडवाना गोड़ महासभा प्रतापगढ़ कामठी ने की।

समारोह में तिरु प्रेम सिंह प्राचार्य कोदवागोडान, टेकाम, शिवबहोर ध्रुवे, अतरिया गणेशी पन्द्राम, नवागांव टिकैत अमर सिंह राज कोटा, तिरथ राम नेताम सहित मातृ शक्ति के रूप में धानबाई धुर्वे एवं रामेश्वरी धुर्वे विशेष रूप से उपस्थित रहीं। करनकापा, पण्डरिया राज, लोरमी राज, कोटा राज, केंदा राज सहित बारह केन्द्रों कुकदुर, उदका, भैसाओदार, रेगाखार, झलरी, कुटेलाटोला, अतरिया, मोहबंधा, करनकापा, कठमुडामाल, कोटा एवं जोगी मंडी से आए पदाधिकारियों और सैकड़ों की संख्या में उपस्थित सगा समाज ने पुरखा व्यवस्था और पारंपरिक संस्कृति के संरक्षण का संकल्प लिया।

महासभा की प्रस्तावना में समाज सुधार और सांस्कृतिक पुनर्स्थापना को विशेष महत्व दिया गया। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 13(3)(क) के अंतर्गत रूढ़ि प्रथा को प्राप्त विधिक मान्यता के आधार पर गोंड समाज द्वारा जन्म संस्कार से मृत्यु संस्कार तक समस्त परंपराओं को पुरखा संस्कृति के अनुसार संचालित करने का निर्णय लिया गया। समाज में शराब बनाना, बेचना एवं सेवन जैसी कुरीतियों पर प्रतिबंध लगाने तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।

इसके साथ ही समाज में क्षेत्रीयता को समाप्त कर ध्रुव गोंड समाज एवं राज गोंड समाज के मध्य वैवाहिक संबंध स्थापित करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। महासभा ने स्पष्ट किया कि अब दोनों समाजों के युवक-युवतियों के विवाह में किसी प्रकार की रोक-टोक नहीं होगी। राष्ट्रीय जनगणना में अलग धार्मिक पहचान के लिए “गोंडी आदिवासी धर्म” लिखवाने का भी सामूहिक निर्णय लिया गया।

महासभा ने आदिवासी अप योजना एवं माडा क्षेत्र के विकास को लेकर भी अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। महासभा पदाधिकारियों ने कहा कि कबीरधाम जिले के 219 गांव माडा मॉडिफाई एरिया के अंतर्गत आते हैं और समाज अपने संवैधानिक अधिकारों तथा समग्र विकास के लिए शासन-प्रशासन से सतत संवाद करता रहेगा।

कार्यक्रम में गोंडवाना के प्रसिद्ध इतिहासकार दादा बी.एल. कोर्राम ने अपने उद्बोधन में कहा कि गोंडवाना का इतिहास करोड़ों वर्ष पुराना और प्रमाणिक है। शिलालेखों, गढ़-किलों, स्मारकों एवं विभिन्न राज्यों से प्राप्त पुरातात्विक साक्ष्य आदिवासी संस्कृति की प्राचीनता को सिद्ध करते हैं। उन्होंने समाज को शिक्षा, रोजगार और संगठन के माध्यम से आगे बढ़ने तथा अपने इतिहास और संस्कृति को पढ़ने एवं समझने का आह्वान किया।

महासभा महासचिव तिरु रामप्रसाद ध्रुवे ने नवमनोनीत पदाधिकारियों की सूची का वाचन किया। सभी पदाधिकारियों और अतिथियों का पिल्ला गमछा पहनाकर सम्मान किया गया तथा नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। दादा बी.एल. कोर्राम द्वारा सभी पदाधिकारियों को सामूहिक शपथ दिलाई गई। पण्डरिया रियासत के राजाओं ने समाज को संगठित रहने एवं अपनी संस्कृति को सुरक्षित रखने का संदेश दिया।

मंच संचालन तिरु करन सिंह मरावी एवं सुरेश कुमार पोर्ते द्वारा किया गया। कार्यक्रम में 14 केंद्रों के पदाधिकारियों की सक्रिय उपस्थिति रही। इनमें कुकदूर से श्री दुखीराम धुर्वे अध्यक्ष एवं श्री दिलीप कुमार धुर्वे सचिव, मोहबंधा से श्री सुरेश पोर्ते अध्यक्ष एवं श्री कमल पोर्ते सचिव, उदका से श्री मोहित धुर्वे अध्यक्ष एवं श्री सुरेश धुर्वे सचिव, करनकापा से श्री श्रीराम धुर्वे अध्यक्ष एवं श्री सरजू धुर्वे सचिव, कोटा से श्री रामचंद मरावी अध्यक्ष एवं श्री शत्रुहन राज सचिव, जरहापारा कुटेलाटोला से श्री रोहित सिंद्राम अध्यक्ष एवं श्री धर्मेन्द्र मरावी सचिव, जोगीमंडी से श्री राजकुमार चेचाम अध्यक्ष, झलरी से श्री नरबद मरावी सचिव एवं श्री पदुम धुर्वे अध्यक्ष, अतरिया से श्री शिवा सिंह पट्टा अध्यक्ष एवं श्री शिवबहोरन धुर्वे सचिव, भैंसा ओदार से श्री मोले सिंह धुर्वे अध्यक्ष तथा कठमुडा माल से श्री अनक राम मरावी अध्यक्ष एवं श्री प्रभु दयाल तिलगाम सचिव शामिल रहे।

गोंडवाना गोड़ महासभा कामठी के पदाधिकारियों के रूप में संरक्षक पद पर तिरु धनुवा राम परस्ते, तिरु शिव बहोर धुर्वे, तिरु जूठेल सिंह मार्को, तिरु अमरसिंहराज सिंह एवं तिरु तिरथ सिंह नेताम को जिम्मेदारी सौंपी गई। अध्यक्ष पद पर तिरु द्विज्वेंद्र सिंह मार्को, उपाध्यक्ष पद पर तिरु संतराम राज, तिरु संतोष राज, तिरु रामदयाल धुर्वे एवं भारत सिंह परस्ते को नियुक्त किया गया। महासचिव के रूप में तिरु रामप्रसाद धुर्वे, सह सचिव के रूप में तिरु गोंविद सिंह, तिरु गुना पट्टा एवं तिरु अधनसिंह मरावी को जिम्मेदारी दी गई।

कोषाध्यक्ष पद पर तिरु रतनसिंह उद्द, संगठन मंत्री के रूप में तिरु भगवानसिंहराज, तिरु उदेशम मरावी, तिरु जगेशर सिंह धुर्वे एवं तिरु गनेशी पन्दाम को नियुक्त किया गया। विधि सलाहकार के रूप में तिरु स्वारथसिंह धुर्वे, तिरु प्रेमसिंह टेकाम, तिरु नरोत्तम मार्को एवं तिरु तेनसिंह मार्को को दायित्व सौंपा गया। मीडिया प्रभारी के रूप में तिरु विजय कुमार राज, तिरु करन सिंह मरावी एवं तिरु रामचरन तथा महामंत्री पद पर तिरु लालसिंह धुर्वे, चरन सिंह श्याम, त्रिलोकी धुर्वे एवं नरबद सिंह झलरी ने शपथ ग्रहण किया।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर महासभा अध्यक्ष तिरुपति द्विजेन्द्र सिंह मार्को ने सभी अतिथियों, कार्यकर्ताओं एवं सेवा सहयोग देने वाले समाजजनों का आभार व्यक्त किया। समारोह में तिरूपति विश्वनाथ पोर्टे, गेंदूराम मरावी, बेदराम मसराम, चैतराम धुर्वे, गेंदलाल धुर्वे, शंकरलाल धुर्वे, बुद्धसिंह मरावी, महावीर धुर्वे, हीरालाल धुर्वे, जोहनसिंह परस्ते, तिहारी सिंह मरावी, भगत श्याम सहित सैकड़ों समाजजन उपस्थित रहे। महासभा ने घोषणा की कि आज से गोंडवाना गोड़ महासभा का संचालन प्रतापगढ़ कामठी से किया जाएगा।

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