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पांडातराई नगर पंचायत में प्रधानमंत्री आवास (शहरी) का ‘व्यावसायिक अड्डा’! नियमों की खुलेआम धज्जियां, जिम्मेदार मौन

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कबीरधाम जिले की पांडातराई नगर पंचायत में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत बने मकानों के व्यावसायिक उपयोग का मामला सामने आया है। जिन आवासों का उद्देश्य शहरी गरीब और पात्र हितग्राहियों को “पक्का आशियाना” देना था, वे अब कथित रूप से दुकानों, गोदामों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों का केंद्र बनते दिखाई दे रहे हैं। सवाल यह है कि क्या यह योजना की मूल भावना के साथ सीधा विश्वासघात नहीं है।

योजना की क्या है मंशा

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), निम्न आय वर्ग (LIG) सहित पात्र परिवारों को आवासीय सुविधा उपलब्ध कराना है। योजना के दिशा-निर्देश स्पष्ट रूप से बताते हैं कि आवास का उपयोग “केवल आवासीय प्रयोजन” के लिए किया जाना चाहिए। लाभार्थी को निर्धारित अवधि तक मकान का विक्रय, हस्तांतरण या किसी प्रकार का दुरुपयोग करने की अनुमति नहीं होती। अधिकांश मामलों में नगर निकायों द्वारा अनुबंध/प्रतिज्ञा पत्र (अंडरटेकिंग) भी लिया जाता है, जिसमें व्यावसायिक उपयोग प्रतिबंधित रहता है।

जमीनी हकीकत: आवास या दुकान

पांडातराई नगर पंचायत के कुछ वार्डों में ऐसे आवासों के सामने शटर लगे दिखाई दे रहे हैं। कहीं किराना दुकान, कहीं मोबाइल रिपेयरिंग, तो कहीं छोटे गोदाम की गतिविधि संचालित होने की चर्चा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई लाभार्थियों ने आवास को आय अर्जन का माध्यम बना लिया है। यदि यह सत्य है, तो यह न केवल योजना के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है बल्कि उन वास्तविक जरूरतमंदों के साथ भी अन्याय है जो अब भी आवास की प्रतीक्षा में हैं।

क्या है कानूनी प्रावधान 

योजना दिशानिर्देश (PMAY-U Guidelines) – आवास का प्राथमिक और अनिवार्य उपयोग आवासीय है। दुरुपयोग पाए जाने पर अनुदान की वसूली और पात्रता निरस्त करने का प्रावधान है।

राज्य/नगर निकाय उपविधियां – नगर पंचायत क्षेत्र में भवन उपयोग परिवर्तन (Change of Land Use/Building Use) के लिए सक्षम प्राधिकारी की अनुमति आवश्यक होती है। बिना अनुमति व्यावसायिक उपयोग नियम विरुद्ध है।

अनुदान की शर्तें – केंद्र एवं राज्य अंशदान से बने आवास का दुरुपयोग होने पर राशि की रिकवरी, दंडात्मक कार्रवाई और भविष्य की योजनाओं से वंचित करने तक की कार्रवाई संभव है।

प्रशासन की भूमिका पर सवाल

स्थानीय स्तर पर निगरानी तंत्र की जिम्मेदारी नगर पंचायत और संबंधित विभागों पर होती है। नियमित निरीक्षण, भौतिक सत्यापन और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई अपेक्षित है। यदि व्यावसायिक उपयोग खुली आंखों के सामने हो रहा है, तो क्या यह निगरानी में चूक नहीं? क्या संबंधित अधिकारियों ने नोटिस जारी किए क्या किसी आवास की सब्सिडी वसूली की कार्रवाई शुरू हुई। इन सवालों के स्पष्ट जवाब अभी तक सामने नहीं आए हैं।

सामाजिक असर और नैतिक प्रश्न

यह योजना गरीब परिवारों के जीवन में स्थिरता और गरिमा लाने के लिए बनाई गई थी। जब आवास व्यावसायिक गतिविधि का केंद्र बनते हैं, तो दोहरी मार पड़ती है—पहली, योजना की विश्वसनीयता पर; दूसरी, उन परिवारों पर जो अभी भी कच्चे घरों में रह रहे हैं। यदि दुरुपयोग को नजरअंदाज किया गया, तो यह गलत परंपरा को बढ़ावा देगा और भविष्य की योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी प्रश्नचिह्न लगाएगा।

अब आगे क्या

जरूरत है कि पांडातराई नगर पंचायत क्षेत्र में बने सभी प्रधानमंत्री आवास (शहरी) का विशेष सर्वे कराया जाए। जिन मामलों में व्यावसायिक उपयोग प्रमाणित हो, वहां नियमानुसार नोटिस, अनुदान वसूली और दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही, पात्र हितग्राहियों को योजना की शर्तों के बारे में पुनः जागरूक किया जाए, ताकि अनजाने में हो रहे उल्लंघन भी रोके जा सकें।

जब तक सख्त कदम नहीं उठाए जाते, तब तक “सबके लिए आवास” का सपना कागजों में ही सीमित रह जाएगा। पांडातराई की तस्वीर यही सवाल पूछ रही है—क्या गरीबों के घर अब कारोबार का अड्डा बनेंगे, या

नियमों का राज कायम होगा।

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