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कुंडा–महली मार्ग पर अवैध खनन और ईंट भट्ठों का जाल शिकायतों के बाद भी प्रशासन मौन, ग्राम पंचायतों ने खोला मोर्चा

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 जिला के पंडरिया अनुभाग में अवैध खनन और बिना अनुमति संचालित ईंट भट्ठों का मामला अब खुलकर सामने आ गया है। कुंडा–महली मुख्य मार्ग (रेंगाखार–गुंजेटा के बीच) पर लंबे समय से चल रही अवैध गतिविधियों के खिलाफ स्थानीय ग्राम पंचायतों ने संयुक्त रूप से अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को लिखित शिकायत सौंपते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है। 

शिकायत में स्पष्ट आरोप लगाया गया है कि बिना राजस्व अनुमति के मिट्टी का अवैध उत्खनन कर ईंट भट्ठों का संचालन किया जा रहा है, जिससे न केवल राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है बल्कि पर्यावरण और सड़क सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है।

शिकायत पत्र के अनुसार, कुंडा–महली मार्ग पर रेंगाखार और गुझेटा के बीच कई स्थानों पर जेसीबी और अन्य भारी मशीनों के जरिए मिट्टी की खुदाई की जा रही है। 

आरोप है कि कुछ स्थानीय लोगों के साथ-साथ मध्यप्रदेश से आए बाहरी व्यक्तियों की भी इस अवैध कारोबार में संलिप्तता है। इन व्यक्तियों की पहचान और उनके कार्य की वैधता संदिग्ध बताई गई है।

 पंचायत प्रतिनिधियों ने साफ कहा है कि यह पूरा काम बिना किसी वैधानिक अनुमति और पर्यावरणीय स्वीकृति के किया जा रहा है।

ग्राम पंचायतों ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि लगातार हो रहे अवैध उत्खनन से सड़क किनारे गहरे गड्ढे बन गए हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बढ़ गई है। भारी वाहनों की आवाजाही से ग्रामीणों का आवागमन बाधित हो रहा है। धूल और प्रदूषण से आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। इसके बावजूद प्रशासनिक अमला अब तक मौके पर ठोस कार्रवाई करता नहीं दिख रहा है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश है।

शिकायत की प्रतिलिपि तहसीलदार पंडरिया और थाना प्रभारी कुंडा को भी भेजी गई है, ताकि राजस्व और पुलिस विभाग संयुक्त रूप से कार्रवाई करें। ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों ने मांग की है कि राजस्व एवं पुलिस की संयुक्त टीम बनाकर तत्काल मौके पर जांच की जाए, अवैध रूप से संचालित ईंट भट्ठों को सील किया जाए और उत्खनन में उपयोग हो रही मशीनों को जब्त किया जाए। साथ ही दोषियों के खिलाफ खनिज अधिनियम, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और राजस्व नियमों के तहत कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

यह पूरा मामला पंडरिया अनुभाग के अंतर्गत आता है, जहां पहले भी अवैध खनन के मामले सुर्खियों में रहे हैं। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किसके संरक्षण में यह धंधा फल-फूल रहा है । क्या संबंधित विभागों को इसकी जानकारी नहीं थी, या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गईं? यदि ग्राम पंचायतों को लिखित शिकायत देनी पड़ रही है, तो यह प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे जनआंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होंगे। पंचायत प्रतिनिधियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अवैध खनन और भट्ठा संचालन से गांव की भूमि, जलस्तर और पर्यावरण को स्थायी क्षति पहुंच रही है। इससे आने वाले समय में खेती और ग्रामीण जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

गौरतलब है कि पूरा क्षेत्र कुंडा थाना क्षेत्र में आता है और प्रशासनिक रूप से छत्तीसगढ़ सरकार के अधीन है। ऐसे में अब निगाहें अनुविभागीय अधिकारी और जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या अवैध खनन माफिया पर नकेल कसी जाएगी, या फिर शिकायतें फाइलों में दबकर रह जाएंगी — यह आने वाला समय बताएगा।

फिलहाल इतना तय है कि ग्राम पंचायतों ने जो दस्तावेजी शिकायत की है, उसने क्षेत्र में चल रहे अवैध कारोबार की परतें खोल दी हैं। अब जिम्मेदारी प्रशासन की है कि वह अपनी संवैधानिक और कानूनी जवाबदेही निभाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई कर यह संदेश दे कि कानून से ऊपर कोई नहीं।

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