दो सप्ताह से वन विभाग की गश्त, ड्रोन और विशेषज्ञों की निगरानी; अफवाह फैलाने वालों पर भारतीय न्याय संहिता सहित अन्य कानूनों के तहत कार्रवाई की चेतावनी
शहर और आसपास के क्षेत्रों में तेंदुए की मौजूदगी की सूचनाओं के बीच वन विभाग ने निगरानी और रेस्क्यू की कार्रवाई तेज कर दी है। पिछले करीब दो सप्ताह से वन विभाग की टीमें सुबह से लेकर देर रात तक संवेदनशील इलाकों में गश्त कर रही हैं। ड्रोन और थर्मल ड्रोन से निगरानी के साथ तेंदुए को सुरक्षित पकड़ने के लिए पिंजरे भी लगाए गए हैं। दूसरी ओर, सोशल मीडिया पर तेंदुए के नाम पर अपुष्ट सूचनाएं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से तैयार भ्रामक फोटो-वीडियो प्रसारित करने वालों के खिलाफ वन विभाग ने कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
सुबह चार बजे से रात दो बजे तक निगरानी
वन विभाग की प्रेस विज्ञप्ति क्रमांक 36 के अनुसार, कवर्धा और भोरमदेव अभयारण्य के परिक्षेत्र अधिकारियों ने गश्ती दल गठित किए हैं। टीमें प्रतिदिन सुबह 4 से 8 बजे और शाम 6 बजे से रात 2 बजे तक शिक्षक कॉलोनी, राजमहल, समनापुर रोड, खूंटू रोड, साधना नगर, लकड़ी टाल, मठ पारा, नवीन बाजार और 17वीं बटालियन परिसर में गश्त कर रही हैं।
क्षेत्र की निगरानी के लिए सुबह सामान्य ड्रोन और रात में थर्मल ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। कानन पेंडारी, बिलासपुर और जंगल सफारी, रायपुर से वन्यजीव विशेषज्ञों को भी बुलाया गया है। विभाग के अनुसार, तेंदुए को सुरक्षित पकड़ने के लिए लकड़ी टाल, मठ पारा, नवीन बाजार और 17वीं बटालियन परिसर में पिंजरे लगाकर उनमें बकरी रखी गई है।
फर्जी वीडियो और अफवाहों पर कानूनी शिकंजे की चेतावनी
वन विभाग का कहना है कि कुछ लोग सोशल मीडिया और व्हाट्सएप समूहों में तेंदुए की मौजूदगी को लेकर असत्य या अपुष्ट सूचनाएं तथा एआई से तैयार फोटो-वीडियो प्रसारित कर रहे हैं। इससे आम लोगों में भय फैलने और रेस्क्यू अभियान में बाधा उत्पन्न होने की आशंका जताई गई है।
विभाग ने चेतावनी दी है कि भ्रामक सामग्री तैयार करने, प्रसारित करने या आगे भेजने वालों के विरुद्ध प्रचलित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसमें भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 353 के तहत लोक रिष्टिकारक कथन या अफवाहों से संबंधित प्रावधान, धारा 336 के तहत कूटरचना से संबंधित प्रावधान तथा परिस्थितियों के अनुसार शासकीय कार्य में बाधा या आदेश की अवहेलना से जुड़े प्रावधान शामिल हो सकते हैं। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और वन्यजीव संरक्षण संबंधी कानूनों के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है।
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि साइबर सेल और पुलिस के सहयोग से भ्रामक सामग्री की जांच कराई जाएगी तथा आवश्यकतानुसार एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, किसी सामग्री को साझा करने मात्र से हर मामले में स्वतः अपराध सिद्ध नहीं होता; कार्रवाई संबंधित तथ्यों, मंशा और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर होगी।
आम लोगों से सतर्कता बरतने की अपील
वन विभाग ने नागरिकों से अपुष्ट फोटो, वीडियो और संदेश साझा नहीं करने की अपील की है। लोगों को रात और अलसुबह अकेले बाहर निकलने से बचने तथा बच्चों और पालतू पशुओं का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है। तेंदुआ दिखाई देने पर उसके पास जाने, पीछा करने, फोटो-वीडियो बनाने या भीड़ जुटाने के बजाय तत्काल वन विभाग को सूचना देने कहा गया है।
तेंदुए की सूचना देने के लिए परिक्षेत्र अधिकारी, कवर्धा अथवा भोरमदेव अभयारण्य के मोबाइल नंबर 9981426667 और 7000030662 पर संपर्क किया जा सकता है। वन विभाग के अनुसार, तेंदुए को सुरक्षित पकड़ने के लिए अभियान जारी है।