एक बार फिर एक सरकारी अफसर की कथित करतूतों ने प्रशासनिक व्यवस्था की नैतिकता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। पीएचई विभाग में कार्यरत एसडीओ नमित कोसरिया पर एक महिला डॉक्टर ने गंभीर आरोप लगाते हुए बिलासपुर सिविल लाइन थाने में दुष्कर्म का केस दर्ज कराया है। पीड़िता का आरोप है कि एसडीओ ने पहले प्रेमजाल में फंसाया, फिर शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए और अंततः धोखा देकर किसी और से विवाह की तैयारी करने लगा।
पीड़िता और आरोपी की पहचान वर्ष 2019 में हुई थी। धीरे-धीरे रिश्ते बढ़े और आरोपी ने शादी का झांसा देकर पीड़िता के साथ संबंध बनाए। वर्ष 2023 में पीड़िता गर्भवती हुई, लेकिन आरोपी ने शादी की बात टालते हुए जबरन गर्भपात करा दिया। इसके बाद वह अपने परिवार की सहमति का बहाना बनाकर शादी से पीछे हट गया।
जब पीड़िता को पता चला कि नमित किसी अन्य युवती से शादी की योजना बना रहा है, तो उसने खुद को ठगा महसूस करते हुए थाने में शिकायत दी। पुलिस ने दुष्कर्म की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। हालांकि आरोपी अभी फरार है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है।
यह मामला सिर्फ एक महिला के साथ अन्याय का नहीं, बल्कि यह दर्शाता है कि कैसे कुछ सरकारी अधिकारी अपने पद और प्रभाव का दुरुपयोग कर आम नागरिकों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं। जनता के सेवक कहलाने वाले जब खुद कानून को ठेंगा दिखाने लगें, तो सिस्टम की साख पर सवाल उठना लाजमी है।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई करेगा? या फिर यह भी एक और “फाइल बंद” मामला बनकर रह जाएगा ।
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