आजादी के 77 वर्ष बाद भी छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले का एक गांव ऐसा है, जहाँ अब तक पक्की सड़क नहीं पहुँच सकी है। बोडला विकासखंड मुख्यालय से महज 10- 12 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत घोंघा के आश्रित गांव जैताटोला के लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
गांव में न तो पक्की सड़क है और न ही किसी जनप्रतिनिधि या प्रशासन की गंभीरता नजर आती है। बारिश के दिनों में हालात इतने खराब हो जाते हैं कि कीचड़, जलभराव और रास्ता कटने की वजह से ग्रामीणों का बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाता है।
स्थानीय ग्रामीण निर्मल दास मानिकपुरी बताते हैं,
“हमर गांव ल घोंघा पंचायत संग जुड़ाय 25 बरस हो गे, फेर आज तक रोड नइ बने सकिस। हर चुनाव में नेता मन वादा करथें फेर चुनाव के बाद पलट जात हैं।”
जैताटोला गांव में सड़क की समस्या कोई नई नहीं है, लेकिन आश्चर्यजनक बात यह है कि इतनी निकटता में होने के बावजूद शासन-प्रशासन की नजर अब तक इस बुनियादी जरूरत पर नहीं पड़ी है।
बरसात के दिनों में स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों को अस्पताल तक ले जाना किसी जंग जीतने से कम नहीं होता। वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत स्तर से लेकर जिला मुख्यालय तक कई बार आवेदन और ज्ञापन दिए गए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों की मांग है कि जैताटोला को जल्द से जल्द पक्की सड़क से जोड़ा जाए ताकि गांव विकास की मुख्यधारा में शामिल हो सके।
सरकारें बदलीं, नेता बदले लेकिन जैताटोला का नसीब नहीं बदला। आज भी गांव में सड़क का इंतजार वैसा ही है जैसा दशकों पहले था।