कबीरधाम जिले में एकीकृत बाल विकास परियोजनाओं (ICDS) के अंतर्गत संचालित पोषण ट्रैकर एप्प में बच्चों की वृद्धि संबंधी विसंगतियों ने एक बार फिर महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। Overweight_SAM-MAM और Obese-MAM जैसे श्रेणियों में बच्चों की संख्या में अचानक बढ़ोतरी देखी गई है, जो कि राज्य स्तरीय निगरानी में दर्ज हुई और अब पूरे जिले में विभागीय जांच का विषय बन चुकी है।
तीन प्रमुख परियोजनाओं में विसंगतियाँ
तरेगांव जंगल परियोजना के दलदली सेक्टर में बच्चों में मोटापे और गंभीर कुपोषण (SAM OBESE) की श्रेणी में वृद्धि दर्ज की गई है।
चिल्फी परियोजना के खारा सेक्टर में निवासपुर-1 और कुरमाखार आंगनबाड़ी केंद्रों में दो बच्चों “Overweight MAM” श्रेणी में दर्शाया गया है।
. बोड़ला परियोजना में महराजपुर, लालपुर, राजानवागांव, पोंडी, बोड़ला-2 आदि सेक्टरों में कुल 6 बच्चों में Overweight या Obese MAM/SAM की श्रेणियों में डाटा दर्ज किया गया है।
निगरानी में लापरवाही या आंकड़ों की हेराफेरी
जिला कार्यक्रम अधिकारी द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस में कहा गया है कि “माह जुलाई 2025 में पूर्व माह की अपेक्षा विसंगतिपूर्ण वृद्धि यह दर्शाती है कि फील्ड स्तर पर निगरानी की भारी कमी है। यदि एक सप्ताह के भीतर विसंगतियाँ दूर नहीं की गईं, तो यह कर्तव्यहीनता मानी जाएगी।”
सूत्रों के अनुसार, राज्य स्तर पर पोषण ट्रैकर एप्प की मॉनिटरिंग नियमित रूप से की जा रही है, जिसके आधार पर उक्त सभी परियोजनाओं को नोटिस जारी किया गया है।
योजना का उद्देश्य भटक रहा विभाग
पोषण ट्रैकर और सुपोषण अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों में कुपोषण को पहचानकर समय पर सुधार करना था। लेकिन अब ये योजनाएं आंकड़ों के खेल में उलझती नजर आ रही हैं। यदि समय रहते फील्ड सुपरविजन को सुदृढ़ नहीं किया गया, तो पोषण स्तर सुधारने की बजाय, यह योजनाएं सिर्फ कागजों पर सिमटकर रह जाएंगी।
जिम्मेदार कौन
परियोजना अधिकारियों और सेक्टर पर्यवेक्षकों को नोटिस भेजकर 7 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण और सुधारात्मक कार्रवाई का निर्देश दिया गया है। परंतु सवाल अब यह है कि क्या यह केवल डाटा एंट्री की चूक है या फिर एक बड़े पैमाने पर चल रहा प्रशासनिक ढीलापन।
यह मामला केवल पोषण आंकड़ों की गड़बड़ी का नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ का है। आवश्यकता है कड़ी निगरानी, जवाबदेही और सुधार की।