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आदिवासी समाज का आक्रोश – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के अपमान पर कवर्धा में उभरा बड़ा आंदोलन

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कवर्धा।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में पहली बार आदिवासी समाज के गौरव और पहचान को मुखर करते हुए मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे विष्णुदेव साय के अपमान का मामला अब तूल पकड़ चुका है। कवर्धा में हुए इस विवादित घटनाक्रम को लेकर आदिवासी समाज ने इसे केवल एक व्यक्ति या पद का नहीं, बल्कि पूरे आदिवासी समुदाय की अस्मिता पर हमला बताया है। सोमवार की देर रात कांग्रेस कार्यकर्ता तुकाराम चंद्रवंशी द्वारा जिला पशु चिकित्सालय में घायल गाय को लेकर नाराजगी जताते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के पोस्टर पर गोबर पोतकर उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने के बाद समाज में भारी आक्रोश फैल गया।

 


घटना और विरोध

घटना के विरोध में शुक्रवार को आदिवासी समाज के सैकड़ों लोग कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। समाज के पदाधिकारियों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि आरोपी तुकाराम चंद्रवंशी पर SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की प्रासंगिक धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर 24 घंटे के भीतर गिरफ्तारी की जाए। समाज ने चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई में विलंब हुआ तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

मुख्यमंत्री का अपमान या आदिवासी अस्मिता पर हमला

ज्ञापन में आदिवासी समाज ने कहा कि श्री विष्णुदेव साय छत्तीसगढ़ राज्य के पहले आदिवासी मुख्यमंत्री हैं। उनके चेहरे पर गोबर पोतना केवल एक राजनीतिक शख्सियत का अपमान नहीं है, बल्कि संपूर्ण आदिवासी समाज की गरिमा, गौरव और पहचान पर सीधा आघात है।
समाज के नेताओं ने कहा कि “यह कृत्य योजनाबद्ध प्रतीत होता है और आदिवासी समाज को नीचा दिखाने की मानसिकता से प्रेरित है।” उनका मानना है कि इस तरह की हरकतें केवल समाज को अपमानित करने के लिए नहीं, बल्कि राज्य में सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक परंपराओं को तोड़ने का प्रयास हैं।

समाज की भावनाएँ आहत

आदिवासी समाज का कहना है कि उन्होंने हमेशा संविधान, कानून और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का सम्मान किया है। लेकिन इस घटना ने पूरे समाज की भावनाओं को गहरी ठेस पहुँचाई है। उन्होंने प्रशासन को स्पष्ट संदेश दिया कि आदिवासी मुख्यमंत्री का अपमान, समाज किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं करेगा।

नेताओं और पदाधिकारियों की मौजूदगी

ज्ञापन सौंपने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल थे। इनमें प्रमुख रूप से विदेशी राम धुर्वे, राजेश छेदावी, हेमंत ठाकुर, पूरण धुर्वे, संतराम धुर्वे, मनोहर, बिहारी धुर्वे, इश्वरी धुर्वे, मोहन धुर्वे, चैन सिंह धुर्वे, लाला राम धुर्वे, राजेन्द्र कुंजम, सुनीता कुंजम, भगवंती मरकाम, काशीराम, भरत, प्यारे मरकाम और शिवचरन सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।

राष्ट्रीय राजनीति में गूंजने की संभावना

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना केवल स्थानीय स्तर पर सीमित नहीं रहेगी, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी गूंज सकती है। क्योंकि छत्तीसगढ़ की राजनीति में पहली बार आदिवासी समाज को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी मिली है। ऐसे में इस प्रकार का अपमानजनक व्यवहार केवल सत्तारूढ़ नेतृत्व के खिलाफ नहीं, बल्कि देशभर के आदिवासी समाज के आत्मसम्मान पर चोट मानी जाएगी।

प्रशासन की जिम्मेदारी

आदिवासी समाज ने साफ कहा है कि यदि दोषी पर कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो यह अन्य असामाजिक तत्वों के लिए प्रोत्साहन का काम करेगा। इसलिए प्रशासन को शीघ्र कार्रवाई कर यह संदेश देना चाहिए कि समाज के गौरव और संविधान की मर्यादा के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

 

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