पंडरिया ब्लॉक के हाईलाइटेड ग्राम कोदवा गोडान के धान खरीदी केंद्र में करोड़ों का घोटाला उजागर हुआ है। लगभग 1.39 करोड़ रुपए का धान गायब होने का मामला केवल केंद्र प्रभारी पर थोपकर निपटाने की कोशिश हो रही है, जबकि परदे के पीछे बड़े मगरमच्छों की मिलीभगत की बू साफ-साफ आ रही है।
निगरानी में ही हेराफेरी!
खरीदी केंद्रों पर पटवारी से लेकर एसडीएम तक दर्जनभर अधिकारियों की ड्यूटी लगी थी। सवाल यह है कि जब स्टॉक लगातार कम होता रहा, तो उनकी निगरानी रिपोर्टों में सबकुछ “सही” कैसे दिखता रहा ।
रकम में भारी अंतर
18 मार्च 2025 को एसडीओ पंडरिया की रिपोर्ट में ₹2.61 करोड़ का घोटाला बताया गया था। आज वही घोटाला घटकर ₹1.39 करोड़ रह गया। आखिर ₹1.21 करोड़ का अंतर कहां और कैसे समा गया ।
समय पर उठाव क्यों नहीं
नियम है कि खरीदी के बाद तय समय-सीमा में धान का उठाव होना चाहिए, लेकिन कोदवा गोडान में हजारों बोरे खुले आसमान तले धूप-बारिश और चोरी के हवाले पड़े रहे। जिम्मेदारी किसकी है? और कार्रवाई केवल प्रभारी तक ही क्यों सीमित है ।
असली गुनहगार अब भी परदे के पीछे
केंद्र प्रभारी भले ही दोषी हो, लेकिन इतने बड़े खेल के लिए विभागीय अधिकारियों और समिति पदाधिकारियों की मिलीभगत साफ झलकती है। जब तक इन्हें बेनकाब कर कार्रवाई नहीं होती, यह पूरा घोटाला केवल “बलि का बकरा” बनाने की कवायद ही माना जाएगा।
कोदवा गोडान का यह घोटाला छत्तीसगढ़ की धान खरीदी व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवालिया निशान है – आखिर करोड़ों की हेराफेरी में असली गुनहगार कब पकड़ में आएंगे ।